पुलिस ने मेडा की कब्जाई गयी 22 बीघा जमीन करवाई खाली
मेडा का कब्जा दिलाने के लिए कब्जाधारियाें को पुलिस ने खदेडा
मेरठ। मंगलवार को अब्दुल्लापुर में बीएनजी के पास 22 बीघा कब्जाई गयी जमीन खाली कराने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी कई थानों की पुलिस को कब्जाधारियों को हटानें के लिए लगना पड़ा । इस दौरानकब्जा धारियों हंगामा करने का प्रयास किया। लेकिन पुलिस ने उनकी एक न सुनी । घंटे तक चले हंगामे के बाद मेडा ने अपनी जमीन पर कब्जा करते हुए दिवार खड़ी कर दी। एतियात के तौर पर पुलिस बल को तैनात कर दिया गया है।
दरअसल अब्दुल्लापुर में बीएनजी के पास 22 बीघा जमीन है। इस जमीन को साल 1992 में मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) ने वीरेंद्र और लक्ष्मण नाम के दो किसानों से खरीदा था। आरोप है कि मेडा ने उनकी जमीन का पूरा पैसा नहीं दिया। किसान इसके विरोध में आ गए।मामला इलाहबाद हाईकोर्ट पहुंचा तो किसानों को स्टे मिल गया। कुछ दिन पहले हाईकोर्ट ने स्टे खारिज कर दिया और जमीन पर कब्जा दिलाने के आदेश जारी कर दिए।
मंगलवार काे मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) की टीम मंगलवार को 22 बीघा जमीन पर कब्जा लेने पहुंची। इस दौरान किसानों ने इसका जमकर विरोध किया। किसान जमीन पर दरी बिछाकर बैठ गए और धरना शुरू कर दिया। हालात बिगड़ते देख कई थानों की पुलिस फोर्स मौके पर बुला ली गई।अधिकारियों ने पहले किसानों को समझाने की कोशिश की, लेकिन जब वे नहीं माने तो पुलिस ने बल प्रयोग कर किसानों को खदेड़ दिया। इस दौरान 8 किसानों को हिरासत में लिया गया है। मेडा अधिकारियों का कहना है कि जमीन खाली कराने के लिए उनके पास सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश है। लंबे समय से किसान जमीन पर अवैध कब्जा किए हुए थे, जिसे हटाने की कार्रवाई की जा रही है।
आठ लोगों को पुलिस ने लिया हिरासत में लिया
इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने विरोध करने वाले 6 किसानों को हिरासत में लिया है, जिन्हें भावनपुर थाने में रखा गया है। इनमें नरेश, देवेंद्र, राजेंद्र, नेपाल, गौरव गुर्जर, रामवती, राजकली, अनीता उर्फ अर्चना शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि इन सभी को फिलहाल सुरक्षा के दृष्टिगत हिरासत में रखा जाएगा। सभी को मुचलका पाबंद भी किया जा सकता है।
जमीन पर जबरन कब्जा लिया जा रहा
किसान दलजीत सिंह कश्यप ने बताया कि उनकी जमीन पर जबरन कब्जा लिया जा रहा है। 1992 में सौदा हुआ था। आज तक कोई मुआवजा नहीं दिया गया। कई बार किसानों की जमीन खुर्द-बुर्द कर दी गई। चार बार में तकरीबन 20 लाख से ज्यादा का नुकसान हुआ है। 15 दिसंबर को फसल खोद दी और झोपड़ी जला दीं। बिना नोटिस व सूचना के कब्जा लेने आ गए। कोर्ट का आदेश बता रहे हैं लेकिन दिखा नहीं रहे।
30 रुपए मीटर से क्यों लें मुआवजा
दलजीत सिंह ने बताया कि वर्तमान में इस जमीन की कीमत 60 हजार रुपए वर्ग मीटर है। इतनी लंबी लड़ाई लड़ते हो गए और अब मेडा कह रहा है कि 30 रुपए वर्ग मीटर के हिसाब से मुआवजा ले लो। क्योंकि मेडा इस जमीन को दो डॉक्टर और एक कारोबारी को बेच चुका है। बिना मुआवजा लिए वह अपनी जमीन कैसे खाली कर दें। डॉक्टर और कारोबारी को लाभ दिलाने के लिए जबरन उनकी जमीन पर कब्जा किया गया है।
लोकल राजनीति के चलते कुछ लोग जबरन यहां जमाये हुए थे
खरीददार डॉ. नीरज कम्बोज ने बताया कि दो जमीन 3800 गज और 4800 गज हैं। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से वह केस जीत चुके हैं। लोकल राजनीति के चलते कुछ लोग जबरन यहां जमाये हुए थे। थे। अब उनको हटा दिया गया है।
कब्जे के बाद तारबंदी का काम शुरु
किसानों से जमीन से हटाने के बाद मेडा की टीम तारबंदी कर रही है। इसके बाद जमीन के मालिकों को कब्जा दे दिया जाएगा।
बोले अधिकारी
इस बारे में मेडा के वीसी संजय मीणा का कहना है उक्त जमीन पर लोगों ने जबरन कब्जा किया हुआ था। जिसे हाईकोर्ट द्वारा स्टे रदद होने के बाद कब्जाई जमीन को मुक्त कराया गया है। तारबंदी होने के बाद असली खरीदार को सुपुर्द कर दिया जाएगा।



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