देश में रोजगार लगातार कम हो रहे है- अमानुल्लाह खान
सौ प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेदश का भारतीय नागरिकों पर प्रभाव पर गोष्ठी का आयोजन
मेरठ। शनिवार को चैम्बर ऑफ कामर्स बॉबेें बाजार में मेरठ डिवीजन इश्योरेस इम्पलाइज यूनियन द्वारा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का भारतीय नागरिकों पर प्रभाव" विषय पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य वक्ता ऑल इंडिया इंश्योरेंस इम्पलाईज एसोसियेशन के पूर्व अध्यक्ष साथी अमानुल्लाह खान थे। विशिष्ट वक्ताओं में नार्थ सैन्ट्रल जोन इंश्योरेस इम्पलाईज फेडरेशन के अध्यक्ष साथी संजीव कुमार शर्मा व सी.आई.टी.यू. के जिला मंत्री साथी सतपाल सिंह थे।
कामरेड अमानुल्लाह खान ने अपने संबोधन में कहा कि देश में रोजगार लगातार कम हो रहे है सरकार ने 29 श्रम कानूनों को समाप्त कर दिया है जिससे श्रमिक संगठनों का निर्माण एवं उनको चलाना अत्यन्त दुश्कर कार्य हो गया है। चार नई श्रम संहिताओं को लागू करके श्रमिकों के अधिकारों पर कुठाराघात किया गया है। छंठनी के लिये पूर्व की 100 श्रमिकों की सीमा को बढ़ाकर 300 श्रमिक करने से देश में 89.2 प्रतिशत श्रमिक श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो गये है। मिल मालिकों को वैधानिक रजिस्टरों को रखने से छूट प्रदान की गई है। काम के घंटे बढ़ाकर 12 घंटे कर दिये गये है। बीमा क्षेत्र के समक्ष चुनौतियों विषय पर बोलते हुये कामरेड खान ने कहा कि बीमा क्षेत्र में सरकार द्वारा शत प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के समर्थन में तर्क दिय जा रहा है कि इससे देश की बीमा की पैठ (इंश्योरेंस पेनिट्रेशन) बढ़ेगी।
उन्होंनें कहा कि पिछले कई वर्षों से भारत की जी.डी.पी. में वृद्धि दर 6-8 प्रतिशत रही है जबकि बीमा क्षेत्र में वृद्धि दर जीवन बीमा में 2017 से 2023 की अवधि के दौरान 11.2 प्रतिशत है और साधारण बीमा क्षेत्र में 15.3 प्रतिशत है। इस वृद्धि दर में सर्वाधिक योगदान सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कम्पनियों जीवन बीमा निगम एवं साधारण बीमा कम्पनियों का है इसके बावजूद सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कम्पनियों को कमजोर और निजी बीमा कम्पनियों को मजबूत करने के लिये कार्य कर रही है। देश में खासतौर पर ग्रामीण परिवारों की मासिक आय 6-8 हजार रुपया प्रतिमाह है जब तक इनकी आय में वृद्धि नहीं होगी जब तक कि लोगों को रोजगार प्राप्त नहीं होगा तबतक सरकार का 2047 तक सभी को बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराने का उददेश्य पूरा नहीं होगा। वर्तमान में घरेलू बचत 5.1 प्रतिशत तक गिर गई है और घरेलू दायित्व जीडीपी की 6.6 प्रतिशत तक बढ़ गये है। जो इस बात का द्योतक है कि देश में हो रहे विकास के लाभों के वितरण में भारत दुनिया के सबसे अधिक असमानता वाले देशों में शामिल है। 2024 की रिपोर्ट के अनुसार सम्पत्ति है।
गोष्ठी को संबोधित करते हुये साथी संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि नई श्रम संहिताओं के माध्यम से सरकार स्थाई प्रकृति के रोजगार को समाप्त करके ठेकेदारी व्यवस्था को लागू कर रही है। इसके लिये ठेकेदार के रूप में पंजीकृत होने की प्रकिया को सरल कर्मियों को रखने का प्राविधन किया गया है। व्यवसाय के मूल प्रकृति के कार्यों में भी संविदा अनिश्चितता होने पर देश में उपभोग पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा जो भारत की आर्थिक प्रगति के लिये अत्यन्त हानिकारक सिद्ध होगा। इस मौके पर इस गोष्ठी में आयकर कर्मचारी महांसघ के साथी निरंजन सिंह, बी.एस.एन.एल कर्मचारी संघ के महामंत्री साथी नरेश पाल, यू.पी.एस.एमआर.ए. के जिला सचिव साथी धनंजय सिंह उपस्थित थे।


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