मतदाता सूची में गड़बड़ी उजागरएक एपिक नंबर पर दो पहचान पत्र
मेरठ। परीक्षितगढ़ में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक ही गांव के दो युवकों के वोटर आईडी कार्ड एक ही एपिक नंबर पर जारी पाए गए हैं। दोनों युवकों का नाम और राशि समान है, लेकिन पिता का नाम और वार्ड संख्या अलग-अलग हैं।
दोनों युवक अपने-अपने वोटर आईडी को असली बता रहे हैं। एक युवक का आईडी कार्ड 2010 में बना था, जबकि दूसरे का कार्ड 2008 में जारी हुआ था। 2008 वाले युवक ने अपना एसआईआर फॉर्म भी भर दिया है जबकि 2010 वाले का फार्म ही नहीं आया है।
क्षेत्र के सुपरवाइजर जितेंद्र कुमार और रामेंद्र कुमार ने इस मामले को पहली बार सामने आया बताया। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की पूरी जांच की जाएगी और सही समाधान निकाला जाएगा।
एसआईआर अभियान के दौरान क्षेत्र में एपिक नंबर मैपिंग से जुड़ी अन्य दिक्कतें भी सामने आईं। कई एपिक नम्बर दूसरी जगहों पर मैप हो गए थे, जिससे फॉर्म भरने में परेशानी हो रही थी।सुपरवाइजरों ने बताया कि जब एपिक नंबर दर्ज किया जाता है, तो सिस्टम में एक ही नंबर पर कई नाम खुल जाते हैं। ऐसे में कुछ बीएलओ गलती से किसी भी एक नाम पर एपिक को मैप कर देते हैं, जिससे गड़बड़ी पैदा होती है।
उन्होंने यह भी बताया कि उनके क्षेत्र में बाहर के लोगएपिक मैपिंग में जुड़ गए थे, उन्हें फोन करके हटवाया गया। इसी तरह, उनके क्षेत्र के एपिक भी दूसरे इलाकों में चले गए थे, जिन्हें सत्यापन करवाकर ठीक कर लिया गया है।
सुपरवाइजरों के अनुसार, इन सभी समस्याओं का समाधान कर दिया गया है और एसआईआर अभियान अब सुचारू रूप से चल रहा है।


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