मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीज की मौत पर हंगामा

इंप्लांट चार्ज के नाम पर तीमारदारों से 40 हजार रूपये लेने के बाद ऑपरेशन किया

मेरठ। मेडिकल अस्पताल में भर्ती एक मरीज की ऑपरेशन के बाद सोमवार को मौत हो गई, इसके बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही और 40 हजार रुपये लेकर बिना बिल दिए इलाज करने का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। इसके बाद मेडिकल थाना पुलिस और छात्र नेता विनीत चपराना मौके पर पहुंचे। पुलिस द्वारा परिजनों को शांत कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया ।

मेडिकल में भर्ती एक मरीज सोनू को रीढ़ की हड्डी में चोट लगने के बाद भर्ती किया गया था जिसका 4 दिसंबर को ऑपरेशन किया गया था। परिजनों का कहना है कि इलाज न मिल पाने के कारण आज मरीज ने दम तोड़ दिया । इसके साथ साथ उनसे 40 हजार रुपये भी इलाज के दौरान लिए गए।

40 हजार रुपये का समान मंगवाया-विनीत

मौके पर पहुंचे छात्र नेता विनीत चपराना ने बताया कि मृतक के मजदूर आदमी था जो मजदूरी कर अपना घर चला रहा था अस्पताल में भर्ती होने के बाद जब तक यूके तीमारदारों ने सामान लाकर नहीं दिया तब तक उसका ऑपरेशन नहीं हुआ।

इस कारण उसकी समस्या और बढ़ गई। तीमारदारों ने कर्ज और चंदा लेकर पैसा जमा कराया तब जाकर उसको इलाज मिला, इस प्रकार की लापरवाही से ही आज मरीज की जान गई है।

कुछ उपकरण नहीं थे मौजूद- डॉ. बालियान

प्रमुख अधीक्षक धीरज राज बालियान ने बताया कि डॉक्टर ने कुछ उपकरण बाहर से मंगवाए गए थे, उनका बिल भी तीमारदारों को दे दिया गया है। इलाज में किसी प्रकार की कोई लापरवाही नहीं हुई है। हर बेहतर प्रयास मरीज के लिए यहां किया जाता है। इसके साथ ही यह भी निर्देश डॉक्टर को दिए गए हैं कि भविष्य में इस प्रकार पैसा लेकर उपकरण न मंगवाया जाए जब तक तीमारदार को पूरी जानकारी न दी जाए ।

प्रभारी मंत्री ने भी जताई थी नाराजगी

कुछ दिन पहले ही प्रभारी मंत्री धर्मपाल सिंह ने भी अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था। इसके बाद उन्होंने प्राचार्य से कहा था कि वह अस्पताल की व्यवस्था से संतुष्ट नहीं है। इस व्यवस्था में जल्द सुधार कर यहां मरीजों को बेहतर सुविधा प्रदान करानी सुनिश्चित की।

इसके बाद भी इस प्रकार का आरोप तीमारदारों द्वारा लगाया जा रहा है। अब सवाल ये है कि इस प्रकार का कार्य करने वाले स्टाफ के खिलाफ प्राचार्य की सख्त कदम क्यों नहीं उठाए गए।

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