मार्निग वॉक करते समय तपोवन में मधुमक्खियों ने लोगों पर बोला हमला
अचानक हुए हमले में घुम रहे लाेगों ने भाग कर बचाई जान , कई को मारे डंक
मेरठ। सीसीएसयू में मंगलवार सुबह मधुमक्खियां के झुंड ने यहां घूमने आए लोगों पर हमला कर दिया। इससे वहां अफरा तफरी मच गई। लोगों ने भाग कर खुद को बचाया। इस दौरान दो से तीन लोग मधुमक्खियां के हमले में चोटिल भी हो गए। हालांकि किसी को गंभीर चोट नहीं आई। तीन दिन से यहां मधुमक्खियां हमलावर हैं।
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में तपोवन बना है। हर रोज मॉर्निंग वॉक के लिए निकले लोग यहां आते हैं। मंगलवार को भी सुबह भी काफी लोग यहां घूमने आए थे। अचानक मधुमक्खियां के एक झुंड ने खलबली मचा दी। जैसे ही मधुमक्खियों ने यहां टहल रहे लोगों पर हमला किया, वह चिल्लाते हुए खुद को बचाने के लिए दौड़े।काफी देर तक तपोवन से लेकर सीसीएस यूनिवर्सिटी के परिसर तक खलबली मची रही। इस दौरान कई लोगों को मधुमक्खियों ने डंक मार दिए। मधुमक्खियां के जाने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली। हालांकि किसी को गंभीर चोट नहीं आई है लेकिन मधुमक्खियां के इस हमले ने दस माह पहले हुई घटना की यादों को ताजा कर दिया है।
सीसीएसयू के तपोवन में लगातार घूमने के लिए आ रहे ऋषभ अग्रवाल ने बताया कि तीन दिन से लगातार मधुमक्खियां हमलावर हैं। सोमवार को यहां एक युवक को मधुमक्खी ने डंक मारा था। रविवार को एक बुजुर्ग को कई मधुमक्खियों ने डंक मार दिए, जिस कारण उन्हें भर्ती कराना पड़ा। अब यहां आते हुए डर भी लगने लगा है।
छात्र उज्जवल का कहना है कि मधुमक्खियां लगातार हमलावर हो रही हैं। कुछ महीने पहले एक बुजुर्ग जान गवां चुके हैं लेकिन कोई गंभीरता नहीं दिखा रहा। यह आम जगह है। हर कोई यहां आना चाहता है। जरूरत है कि सीसीएसयू प्रशासन उन्हें सुरक्षित माहौल दे।
सोनू बत्रा बताते हैं कि तपोवन में आने पर मन लगता है। यहां जो इंतजाम किये गये हैं, वह काबिल ए तारीफ हैं। इन्हें और बेहतर करने की जरूरत है। यूनिवर्सिटी प्रशासन सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम करे तो बेहतर होगा।
इसी वर्ष 22 फरवरी को भी चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर में मधुमक्खियों ने यहां आए लोगों पर हमला किया था। इस हमले में 74 वर्षीय बुजुर्ग धर्मवीर सिंह की मौत हुई थी जबकि 25 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। उसे वक्त काफी दूर तक मधुमक्खियां के झुंड ने लोगों को दौड़ा लिया था।
कई घंटे तक चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर की गतिविधियां बाधित रहीं। बाद में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने जगह-जगह बने मधुमक्खियों के छत्ते हटवाने का काम किया था।



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