NGT सुनवाई में निगम ने सौंपी 189 पन्नों की रिपोर्ट
3 फरवरी को होगी अगली सुनवाई देना होगा 5 करोड़ का जुर्माना
मेरठ। कूड़ा निस्तारण की खराब व्यवस्था को लेकर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) में हुई सुनवाई के दौरान नगर निगम मेरठ की ओर से 189 पेज की एफिडेविट प्रस्तुत की गई। नगर आयुक्त ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से और अपर नगर आयुक्त लवी त्रिपाठी ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर पक्ष रखा। नगर निगम की ओर से अधिवक्ता भंवर सिंह ने न्यायालय में उपस्थिति दर्ज कराई।
नगर निगम की दलीलों और प्रस्तुत एफिडेविट से माननीय अधिकरण संतुष्ट नहीं हुआ। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के अधिवक्ता ने आपत्ति जताते हुए कहा कि नगर निगम अभी भी ताजे कूड़े को लोहियानगर डंपिंग ग्राउंड में ही डंप कर रहा है, जिससे क्षेत्र में वायु और जल प्रदूषण की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है।
शिकायतकर्ता के वकील ने यह भी बताया कि जिस कंपनी को नगर निगम ने कूड़ा निस्तारण कार्य के लिए नियुक्त किया है, उसने भी अपेक्षित स्तर पर कार्य नहीं किया है। इस पर न्यायालय ने नगर निगम मेरठ को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता के आपत्तियों का विस्तृत जवाब प्रस्तुत करे।
5 करोड़ जल्द से जल्द देने के आदेश
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से भी जिलाधिकारी मेरठ के माध्यम से रिपोर्ट दाखिल की गई। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि नगर निगम मेरठ ने अब तक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लगाए गए लगभग पाँच करोड़ रुपये के जुर्माने का भुगतान नहीं किया है।
जिलाधिकारी मेरठ की ओर से भी 60 पेज की एफिडेविट एनजीटी में प्रस्तुत की गई, जिसमें बताया गया कि यह राशि अभी तक सरकारी कोष में जमा नहीं की गई है। इस पर न्यायाधिकरण ने नगर निगम मेरठ को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह लंबित जुर्माने की धनराशि शीघ्र जमा करे और कूड़ा निस्तारण व्यवस्था को दुरुस्त करने के ठोस कदम उठाए। एनजीटी ने मामले की अगली और अंतिम सुनवाई 3 फरवरी 2026 को निर्धारित की है।


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