शोभित विवि में भारतीय ज्ञान प्रणाली पर राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन
मेरठ। शोभित इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), मेरठ द्वारा आयोजित भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का सफल समापन आज अत्यंत सारगर्भित, विचारोत्तेजक और शोध–समृद्ध सत्रों के साथ हुआ। इस सम्मेलन ने भारतीय ज्ञान परंपरा के वैज्ञानिक दृष्टिकोण, उसके वैश्विक महत्व और आधुनिक परिप्रेक्ष्य में उसकी प्रासंगिकता को नई ऊर्जा प्रदान की।
द्वितीय दिवस का शुभारंभ पद्मश्री डॉ. भारत भूषण त्यागी के प्रेरक कीनोट एड्रेस से हुआ, जिसमें उन्होंने वेदों की अंतर्दृष्टि और भारतीय चिंतन की गहराई पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन में परिवर्तन विचारों की गुणवत्ता से आता है। उन्होंने बताया कि सोच को सशक्त करने से समाधान स्वतः निर्मित होते हैं और आज के समय में चिंतनशीलता भारतीय समाज के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने शोभित विश्वविद्यालय के इस महत्वपूर्ण प्रयास की सराहना करते हुए इसे भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक प्रभावशाली कदम बताया।
कीनोट के बाद आयोजित तकनीकी सत्रों में देशभर के विद्वानों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय हरियाणा के डीन श्री बिजेंद्र सिंह ने भारतीय ज्ञान और आधुनिक शिक्षा के समन्वय पर विचार साझा किए, जबकि प्रो. (डॉ.) एम एल सिंघला, पूर्व डीन, फ़एमस दिल्ली विश्वविद्यालय ने भारतीय प्रबंधन चिंतन और नेतृत्व नैतिकता पर अत्यंत महत्वपूर्ण व्याख्यान प्रस्तुत किया। उद्योग विशेषज्ञ श्री अमब्रिश द्विवेदी ने गीता के दृष्टांतों के माध्यम से विकास के लिए इनपुट पर ध्यान केंद्रित करने की अवधारणा को स्पष्ट किया। शोधार्थियों के अनेक शोधपत्रों ने भी सम्मेलन को विद्वतापूर्ण आयाम प्रदान किए, जिनके निष्कर्षों को विश्वविद्यालय आगामी समय में नीति-निर्माण संस्थाओं से साझा करेगा।
सम्मेलन के वैलिडिक्टरी सत्र में शोभित विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति, प्रो. (डॉ.) वी.के. त्यागी, ने अपने प्रेरक संदेश में भारतीय ज्ञान प्रणाली के बढ़ते महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वर्तमान युग में IKS केवल एक शैक्षणिक विषय नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण का अनिवार्य आधार बन चुका है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान विज्ञान, दर्शन, चिकित्सा, गणित और प्रबंधन जैसे विविध क्षेत्रों में आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना प्राचीन काल में था। उन्होंने ध्यान केंद्रित करते हुए कहा की शोभित विश्वविद्यालय शीघ्र ही “इंडियन नॉलेज सिस्टम्स सेंटर” की स्थापना करने जा रहा है, जो विश्वविद्यालय की सर्वोत्तम शैक्षणिक पहलों में से एक होगा और शोधकर्ताओं तथा छात्रों को IKS पर अध्ययन, शोध और नवाचार के उत्कृष्ट अवसर प्रदान करेगा।
वहीं, वरिष्ठ शिक्षाविद् और प्रबंधन विशेषज्ञ प्रो. एम.एल. सिंगला ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली पर आधारित सम्मेलन विश्वविद्यालयों को केवल अकादमिक मजबूती ही नहीं देता, बल्कि उन्हें सांस्कृतिक चेतना और नैतिक मूल्यों के संवाहक संस्थानों के रूप में स्थापित करता है। उन्होंने कहा कि शोभित विश्वविद्यालय द्वारा IKS केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप है और यह कदम विश्वविद्यालय को देश के अग्रणी शैक्षणिक संस्थानों की श्रेणी में और अधिक मज़बूती से स्थापित करेगा।
सम्मेलन के दौरान छह अलग-अलग शोध ट्रैकों में उत्कृष्ट शोध कार्य के लिए प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया, जबकि सर्वश्रेष्ठ पोस्टर प्रस्तुति का पुरस्कार आंशिक अग्रवाल को “ प्रदान किया गया। समापन अवसर पर प्रतिभागियों, शोधकर्ताओं, वक्ताओं और विशिष्ट अतिथियों को प्रमाणपत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान किए गए।
सम्मेलन संयोजक डॉ. सैल धाका ने आयोजन समिति, फैकल्टी सदस्यों और शोधार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मेलन भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान, प्रौद्योगिकी और वैश्विक शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने का प्रेरक मंच सिद्ध हुआ है। इस सफल आयोजन में कुलसचिव डॉ गणेश भारद्वाज,डॉ. अनिकेत कुमार, डॉ. सुरभि सरोहा, डॉ. मोनिका चौधरी, डॉ. नेहा त्यागी, डॉ. शिवा शर्मा, डॉ. महतो, डॉ. लोमस तोमर, डॉ निहारिका पिलानिया, डॉ निकिता, तथा अन्य संकाय सदस्यों ने उल्लेखनीय योगदान दिया।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉक्टर नेहा यजुर्वेदी द्वारा किया गया।
यह दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन इस तथ्य का स्पष्ट प्रमाण है कि भारतीय ज्ञान प्रणाली केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर नहीं, बल्कि आधुनिक विश्व के लिए एक स्थायी, समावेशी और मानव–केंद्रित विकास मॉडल का शक्तिशाली विकल्प प्रस्तुत करती है। शोभित विश्वविद्यालय द्वारा किया गया यह प्रयास शोध, नवाचार और परंपरा के सुंदर संगम का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा।


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