युवाओं को बेदम करता नशा
 राजीव त्यागी 
देश की कुल आबादी का 65 फीसदी भाग युवा है। यह युवा भारत की आर्थिक, सामाजिक व राजनीतिक विकास की बैकबोन है, लेकिन दुर्भाग्यवश भारत का युवा नकारात्मक नशों की ओर लगातार अग्रसर हो रहा है। ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज स्टडीज 2017 के आंकड़ों के मुताबिक दुनिया भर में लगभग 7.5 लाख युवाओं की मौत अवैध ड्रग्स से हुई है।

 इनमें से लगभग 22000 मौतें भारत में ही हुई हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो देश में अचानक चार-पांच सालों से मादक तत्वों का प्रयोग बढ़ा है। पंजाब, हिमाचल, गुजरात राज्य के युवा अधिक रूप से नशे के प्रभाव में आ रहे हैं, क्योंकि यहां से युवाओं को नशे की पुडिय़ा की सप्लाई आसानी से उपलब्ध हो जाती है। इस कारण पंजाब राज्य की भगवंत मान सरकार को अपनी कुल आय का सालाना 2.2 प्रतिशत ड्रग्स की रोकथाम के लिए खर्च करना पड़ रहा है। 



तनाव भी युवाओं को नशे की ओर धकेलने में मदद करता है। तनाव परीक्षाओं में कुछ अंकों से असफल हो जाने का हो सकता है, तनाव घर वालों की आकांक्षाओं पर खरा न उतरने का हो सकता है। भारत सरकार और पंजाब सरकार ने एक अध्ययन (डायनामिक ऑफ ड्रग्स एडिक्शन एंड एब्यूज इन इंडिया इन फोकस ओन पंजाब 2024) किया। इसमें पाया गया कि 77 फीसदी जो युवा नशा करते हैं, वे 14 से 34 साल के बीच के हैं। इस अवधि के दौरान बच्चा स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय में होता है और उसे वहां संगत मिलती है। संगत से ही वे अच्छी चीज और बुरी चीज सीखते हैं। उसी में एक नशा भी हो सकता है। अब समय आ गया कि नशे के खिलाफ एक क्रांति करनी होगी।

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