वायु प्रदूषण से सांस एवं एलर्जिक साइनाइटिस की हो सकती है समस्या

 सर्दियों में प्रदूषण फाग और स्माग से बचकर रहे

 मेरठ: देश विभिन्न राज्यों में लगातार वायु प्रदूषण बढ़ रहा है इस वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर के साथ एलर्जिक साइनाइटिस की समस्या भी लोगों में बढ़ जाती है इसमें लोगों को बार-बार छींक आने नाक बहने और नाक ब्लॉक हो जाने की समस्या हो जाती है सांस लेने में भी दिक्कत होती है और इसे हल्के में लेने की जरूरत नहीं होती समय पर सही से उपचार करना चाहिए यदि 3 से 4 साल तक यह समस्या अनियंत्रित रहती है तो दमा जैसी गंभीर बीमारी में भी यह परिवर्तित हो सकती है इसकी संभावना लगभग 60 से 70% तक बनी रह सकती है एलर्जिक साइनाइटिस बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को परेशान करती है बचाव के लिए धूल घर के बाहर जलते कचरा वह अन्य प्रकार के धुएं और घर के अंदर अगरबत्ती के धुएं से भी बचने की आवश्यकता होती है प्रदूषण से उपजे इस मार्ग के दौरान मास्क लगाकर निकालने की जरूरत होती है । 



स्थमा और सीओपीडी से कैसे बचा जा सकता है

 मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डा. दिव्याशं सेंगर ने बताया  सर्दी बढ़ने पर जुकाम गला खराब होना खांसी और बलगम की स्थिति बनती है कई बार बुखार भी आ सकता है अस्थमा और कापड की बीमारी फेफड़ों से जुड़ी हुई होती है सांस लेने में कती होती है अस्थमा अनुवांशिक एलर्जी जैसे धूल पालतू पशुओं वायरल संक्रमण से हो सकता है यह बीमारी पाचन से शुरू हो जाती है धूम्रपान या धुआं इसका कारण हो सकते हैं यह बीमारी 40 साल के बाद होती है बचाव में धूल धुएं पालतू पशुओं की रूसी से बचकर रहना चाहिए प्रदूषण के दौरान मांस का उपयोग करना चाहिए समस्या होने पर एक-रे और पलमोनरी फंक्शन टेस्ट करने की आवश्यकता पड़ती है

 प्रदूषण से किन लोगों को संक्रमण का खतरा होता है

 लगातार प्रदूषण में रहने से 5 साल से कम उम्र के 8 से 22% बच्चों को फेफड़े का संक्रमण का खतरा बना रहता है बड़ों में 1 से 2% या खतरा रहता है प्रदूषण के दौरान बाहर निकलने पर मास्क लगाने की सलाह डॉक्टर द्वारा दी जाती है वैसे रुमाल का प्रयोग भी कर सकते हैं इस मार्ग होने पर धूप निकलने के बाद ही बाहर जाना उचित रहता है शाम को 4:00 बजे के बाद घर से निकाल ले से बचना चाहिए क्योंकि उसे समय प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ रहता है

 प्रदूषण का कितना स्तर खतरनाक होता है

 विभिन्न जिलों में  देखा जा रहा है कि प्रदूषण के स्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है यह बढ़ोतरी 2.5 पीएम और 10 पीएम तक पहुंचती है तो प्रदूषण का स्तर काफी बड़ा हुआ माना जाता है इसके अलावा वातावरण में सल्फर नाइट्राइड ऑक्सीडेस मोनोऑक्साइड जैसी गैसों की मात्रा भी बढ़ जाती है जो की काफी नुकसानदेह होती है इस समय फाग तथा स्माग भी देखने को मिलता है  फाग एक उसे है जो प्राकृतिक होती है जिसे वाष्प कहते हैं स्मॉल में उसके साथ हानिकारक कार्बनिक पार्टिकल होते हैं हानिकारक गैसों से दम टैक्स संक्रमण निमोनिया और सांस लेने की तकलीफ आंखों में जलन जैसी परेशानियां होती हैं यह सभी गैस फेफड़ों के लिए नुकसानदायक होती है

सांस की अटैक को कैसे पहचाने

 जब सांस लेने में काफी दिक्कत होने लगती है तो उसकी जांच की जाती है जांच में देखा गया है कि सांस नली में सूजन आ जाती है वह सिकुड़ जाती है बलगम बढ़ जाता है फेफड़ों में हवा का जाना आना मुश्किल हो जाता है सांस फूलना सीने में जकड़न घबराहट साथ-साथ घर ग्राहट की आवाज आना मुख्य लक्षण है इसे डैम का अटैक कहते हैं इसमें सीने में दर्द नहीं होता है जबकि हार्ट अटैक में घबराहट पसीना आना बाएं हाथ या गले में दर्द होना प्रमुख लक्षण है दोनों ही समस्याएं एक साथ हो सकती है चिकित्सा एक ब्लड जांच पीएफटी सभी जांच करते हैं उसके उपरांत पता चलता है कि मरीज को कितनी दिक्कत है

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