वाट्सएप पर शादी का कार्ड का मैसेज आये कदापि न खोले
जरा सी लापरवाही पर आपका व्हाटसएप व मेल हो सकता है हैक
-शादी के मौसम में साइबर ठगों में ठगी के नया पैंतरा अपनाया
मेरठ। मोबाइल प्रयोग करने वालो ंको सूचित किया जाता है। अगर आपके मोबाइल पर कोई शादी का निमत्रंण का मैसेज या पीडीएफ आती है। तो उससे खोलने से पहले संबधित व्यक्ति से पूछ जरूर ले हो सकता है आपकी जरा सी लापरवाही से आपका मोबाइल व आपका मेल हैग हो सकता है।
एक सप्ताह पहले परतापुर थाने की रिठानी चौकी प्रभारी के वाट्सएप पर एक परिचित के नाम से फीड नंबर के माध्यम से शादी के निमंत्रण की पीडीएफ फाइल आई थी, जैसे ही चौकी प्रभारी ने पीडीएफ को डाउन लोड किया तो उनका मोबाइल हैंक हो गया, क्योंकि वह पुलिस में थे, इसलिए तत्काल समझ गए थे कि साइबर ठगों ने उनके मोबाइल को हैंक कर वाट्सएप डाटा ले लिया था। बिना देर किए चौकी प्रभारी ने तत्काल थाने की साइबर हेल्प डेस्क की मदद ली और अपने मोबाइल को ठीक कर लिया, लेकिन तब साइबर ठग चौकी प्रभारी के परिचितों के वाट्सएप पर मैसेज भेज कर रकम की मांग कर चुके थे। इस दौरान उनके परिचितों ने समस्या जाने के लिए काल भी की थी, लेकिन मोबाइल हैंक होने के कारण उनकी नहीं हो पाई। मोबाइल ठीक होने पर चौकी इंचार्ज के पास परिचितों की काल आने पर उन्हें पूरे मामले की जानकारी हुई।
शादी का निमंत्रण देखकर पत्रकार भी फंसे
इस आधुनिक युग में सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए सोशल मीडिया काफी मुफीद है। प्रेस वार्ता के निमंत्रण से लेकर सूचनाओं का आदान प्रदान और शादी के निमंत्रण भी पीडीएफ बनाकर राजनीतिक पार्टियों से लेकर व्यापारी वर्ग पत्रकारों के वाट्सएप पर भेजते है। गुरुवार रात को साइबर ठगों के भ्रम जाल में मीडियाकर्मी भी फंस गए। दरअसल एक मीडियाकर्मी के बेटे की शादी के निमंत्रण की पीडीएफ साइबर ठग ने मीडियाकर्मियों से लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं के वाट्सएप पर पत्रकार के नाम से भेजी थी, जैसे ही मीडियाकर्मियों ने पीडीएफ को डाउन लोड किया तो एक दर्जन से अधिक मोबाइल हैंक हो गए और उनके वाट्सए बंद हो गया। वाट्सएप उड़ते ही मीडियाकर्मी परेशान हो गए। जिसे मीडिया कर्मी के बेटे की शादी का निमंत्रण था, जब उनसे बात की तो पता चला उन्होंने कोई निमंत्रण नहीं भेजा है। शुक्रवार देर शाम तक एक दर्जन से अधिक मीडियाकर्मियों के वाट्सएप चालू नहीं हो पाए थे।
सबसे ज्यादा माध्यवर्गी हो रहे है शिकार
थाने में गठित साइबर हेल्प डेस्क के पास साइबर ठगी की जितनी शिकायतें आ रही है। उनमें से अधिकांश मध्यवर्गीय लोगों की है। लगातार साइबर हेल्प डेस्क पीड़ितों की मदद भी कर रही है और रोज साइबर ठगी का शिकार हुए एक से लेकर दो पीड़ितों के रुपये भी वापस करा रही है, लेकिन पुलिस द्वारा जागरूकता के लिए तमाम तरह के चलाए जा रहे अभियनों पर लोग पूरी तरह से ध्यान नहीं दे रहे है, इसलिए वह साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं।
इनका कहना है...
साइबर अपराध से लोगों को बचाने के लिए पुलिस लगातार जागरूकता अभियान चला रही है। ताकि सोशल मीडिया पर साइबर ठगों द्वारा भ्रमित करने के लिए भेज जा रहे लिंक से लोग सचते रहे। इनसे सावधान रहने की सलाह लगातार दी जा रही है कि किसी अंजान लिंक पर क्लिक न करे और अपना डाटा किसी से शेयर न करें। अगर किसी परिचित के नाम से भी कोइ संदेश आता है तो पहले उसे कंर्फम जरूर करें।
-अवनीश कुमार, एसपी क्राइम।


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