शोभित विवि में भारतीय ज्ञान प्रणाली पर राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य शुभारंभ 

मेरठ। शोभित इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), में भारतीय ज्ञान प्रणाली के दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ आज वैदिक मंत्रोच्चार और हवन के साथ हुआ। गणेश वंदना एवं हवन की पवित्र अग्नि के समक्ष विश्वविद्यालय के माननीय कुलाधिपति कुंवर शेखर विजेन्द्र जी, मेरठ एवं गंगोह कैंपस के माननीय कुलपति तथा वरिष्ठ विद्वानों की उपस्थिति ने पूरे परिसर को भारतीय आध्यात्मिक परंपरा से सराबोर कर दिया।

शुभारंभ के उपरांत कुलाधिपति ने परिसर में आयोजित स्वदेशी मेला का उद्घाटन किया। उन्होंने अतिथि–विशेष प्रो. (डॉ.) देबी प्रसाद मिश्रा, पूर्व निदेशक, NITTTR कोलकाता, तथा वैद्य कर्तार सिंह धिमान, कुलपति, श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र के साथ विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। मेले में छात्रों द्वारा प्रस्तुत हस्तनिर्मित, जैविक एवं पारंपरिक उत्पादों की झलक ने भारतीय संस्कृति, नवाचार और समग्र स्वास्थ्य परंपरा की समृद्धता को जीवंत कर दिया।

इसके पश्चात सम्मेलन के औपचारिक उद्घाटन सत्र में मंचासीन विशिष्ट अतिथियों द्वारा स्मारिका का विमोचन किया गया। इस अवसर पर अपने प्रेरक संबोधन में माननीय कुलाधिपति श्री कुंवर शेखर विजेन्द्र जी ने कहा कि—भारतीय ज्ञान प्रणाली केवल हमारी प्राचीन धरोहर ही नहीं, बल्कि हमारे भविष्य का मार्गदर्शन करने वाली एक प्रबल प्रेरक शक्ति है। वैदिक चिंतन, योग, आयुर्वेद और नीति–शास्त्र आज भी वैश्विक चुनौतियों के लिए संतुलित, मानवीय और टिकाऊ समाधान प्रस्तुत करते हैं।

उन्होंने कहा कि हस्तिनापुर की यह अनूठी विरासत सदियों से हमारे सांस्कृतिक वैभव की प्रतीक रही है। यहां देश का सबसे बड़ा चर्च स्थित है, पाँच प्यारों में से एक का उद्गम भी यही से माना जाता है, और जैन धर्म के प्रमुख तीर्थों में से एक भी इसी धरा से जुड़ा है।

इसीलिए मेरठ और इसका ऐतिहासिक–आध्यात्मिक परिवेश विशेष महत्व रखता है। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम सब मिलकर Indian Knowledge System पर संवाद को गहराई दें, उसे समझें और आधुनिक संदर्भों में आगे बढ़ाएं।इसी अवसर पर माननीय कुलाधिपति ने एक महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक घोषणा करते हुए कहा कि—

शोभित विश्वविद्यालय में “भारतीय ज्ञान प्रणाली केंद्र (Centre for Indian Knowledge System – CIKS)” की स्थापना की जाएगी।यह केंद्र छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए वैदिक अध्ययन, योग, आयुर्वेद, भारतीय दर्शन, नीति-शास्त्र और पारंपरिक विज्ञानों के अध्ययन, शोध और प्रशिक्षण का एक सशक्त और संरचित मंच प्रदान करेगा।

कार्यक्रम में शोभित विश्वविद्यालय के वासु शोभित, वाइस प्रेसिडेंट (टेक्नोलॉजी), अभिनव शोभित, वाइस प्रेसिडेंट इंटरनेशनल अफेयर्स,श्री वंश शेखर, डायरेक्टर (न्यू इनिशिएटिव्स), साथ ही विश्वविद्यालय के सभी डीन, निदेशक एवं वरिष्ठ अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे, जिनकी गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को और भी प्रेरक बनाया।सम्मेलन के प्रथम दिवस में विभिन्न तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें योग एवं ध्यान, आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से समग्र स्वास्थ्य, भारतीय ज्ञान परंपरा के समकालीन अनुप्रयोग जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तृत विचार रखा।

इसके साथ ही दो महत्वपूर्ण पैनल चर्चाएँ भी आयोजित हुईं, जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, सतत विकास और भारतीय ज्ञान प्रणाली के आधुनिक महत्व पर गहन विमर्श हुआ।

पहले दिन का समापन एक शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसमें छात्रों ने भारतीय संस्कृति की जीवंत छटा, वैदिक परंपरा, भारतीय नृत्य, संगीत और सांस्कृतिक विविधता से परिपूर्ण प्रस्तुतियाँ दीं। यह सांस्कृतिक संध्या भारतीय ज्ञान, वेदों और परंपराओं में निहित आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गहराई का प्रभावी प्रतीक बनी।

प्रथम दिवस ने यह सिद्ध किया कि भारतीय ज्ञान प्रणाली न केवल भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक धरोहर है, बल्कि आधुनिक वैश्विक विकास के लिए एक सशक्त वैकल्पिक मॉडल भी प्रस्तुत करती है। स्वदेशी मेले की सांस्कृतिक छटा, विद्वानों के विचार, और छात्रों की सक्रिय सहभागिता ने शोभित विश्वविद्यालय को भारतीय परंपरा, नवाचार और अकादमिक उत्कृष्टता के एक अद्वितीय संगम के रूप में स्थापित किया।

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