सैन्य सम्मान के साथ अग्निवीर शहीद ललित पैतृक गांव में हुआ अंतिम संस्कार
बेटे के शव से लिपटकर रोई मॉ ,अंतिम दर्शन के लिए लोगों की उमड़ी भीड़
मेरठ। पुंछ ब्लॉस्ट में शहीद हुए मेरठ के अग्निवीर ललित का पार्थिव शरीर रविवार को उनके पैतृक गांव पस्तरा गांव पहुंचा। शव के अंतिम दर्शन को लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। जब तक सूरज चांद रहेगा ललित तेरा नाम रहेगा .. के नारे और भारत मां के जयकारों से इलाका गूंज उठा।शहीद का पार्थिव शरीर गांव में पहुंचते ही लोगों की आंखें नम हो गई तथा परिजनों की चीत्कार से माहौल गमगीन हो गया था। मां बेटे के शव को देखकर लिपटकर रोने लगी। इसके बाद सैन्य सम्मान के साथ ललित के शव का अंतिम संस्कार किया गया।
शव के गांव में पहुंचते ही लोगों की आंखों से फूट पड़े आंसू
शहीद अग्निवीर का शव रविवार को सुबह दस बजे पैतृक गांव में आर्मी के ट्रक में पहुंचाा। शव के पहुंचते ही लोगों की भीड़ एकत्र हो गयी। गांव का शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति न हो जिसकी आंखों मेंआंसू न हो। सेना के जवानों ने तिरंगे में लिपटे शव को सैन्य वाहन से शव को उतारा तो मृतक के परिजन अपने सपूत के अंतिम दर्शन के लिए प्रयास करने लगे। शहीद पत्नी व मॉ शव से लिपट कर रो पड़ी। यह दृश्य देकर लोगों की आंखे नम हो गयी। सेना के जवानों ने शहीद को अंतिम सलामी दी।
ट्रेनिंग पीरियड़ के दौरान तीन बार घर पर आया था ललित
ललित कुमार 25 जुलाई को जम्मू-कश्मीर के पुंछ में शहीद हो गए। वह जम्मू-कश्मीर में जाट रेजिमेंट में तैनात थे।अग्निवीर की मां सरोज बाला बोली बेटे ने जब सेना का फॉर्म भरा तो किसी को नहीं बताया। उसका चयन हुआ तो वह मेरे पास आया। मुझसे बोला- अम्मा मेरा आर्मी में जाने का सपना पूरा हो गया। मैं सोल्जर बन गया, सेना में नौकरी लग गई। उसने मेरे पैर छुए। मैंने उसे गर्व से सीने से लगा लिया। मगर अब उसे कैसे देखूंगी।उन्होंने बताया- ट्रेनिंग पीरियड से अभी तक बेटा सिर्फ 3 बार ही घर आया था। 9 जुलाई को वह घर से गया था। वह रोज फोन पर बात करता। ट्रेनिंग के बारे में बताता था।
उसने कब क्या खाया, क्या नाश्ता किया। सब कुछ बताता रहता था। हम लोगों से भी हालचाल पूछता था। मगर इस बार उससे 15 दिन में 2 बार ही बात हुई थी। हादसे से पहले उसका फोन आया था। उसने कहा था कि ड्यूटी पर रहता हूं। इसलिए फोन करने का टाइम नहीं मिल पाता। जल्द ही आऊंगा, मगर वह ऐसे आएगा यह नहीं सोचा था।
तीन भाईयों में था सबसे छोटा
ललित तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। पिछले छह महीने से उनकी ड्यूटी पुंछ में चल रही थी। पेट्रोलिंग के दौरान बम जैसे किसी विस्फोटक पर अचानक ललित का पैर लग गया और ब्लास्ट हो गया। इसमें ललित शहीद हो गए। डेढ़ साल पहले ही ललित सेना में भर्ती हुए थे।
सेना के अधिकारियों ने दी श्रद्धाजलि
व्हाइट नाइट कोर ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा- व्हाइट नाइट कोर के जनरल-ऑफिसर-कमांडिंग और सभी रैंक 7 जाट रेजिमेंट के अग्निवीर ललित कुमार को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिन्होंने कृष्णा घाटी ब्रिगेड के क्षेत्र में गश्त के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया। हम इस दुख की घड़ी में शोक संतप्त परिवार के साथ खड़े हैं।
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