दयानंद सरस्वती ने जाति, धर्म, संप्रदाय से ऊपर उठकर सामाजिक कुरीतियों को मिटाकर अखण्ड भारत के निर्माण में जुटने का आवाहन किया- राज्यपाल
केरल की राज्यपाल ने साहित्य कला, योग एवं आध्यात्म से जुड़े देश भर से आये 72 विभूतियों को किया सम्मानित
महर्षि दयानंद सरस्वती की 200 वी. जयंती राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं “भारत विभूति सम्मान का आयोजन
मेरठ। राष्ट्रीय राजमार्ग बाईपास स्थित श्री वैंकटेश्वरा विश्वविद्यालय एवं अखिल भारतीय साहित्य परिषद के संयुक्त तत्वाधान में स्वामी दयानंद सरस्वती की 200 वी. जयंती वर्ष पर “वसुधैव कुटुंबकम विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं देश के विख्यात 72 (बहत्तर) साहित्यकारों के लिए “भारत विभूति सम्मान-2024” का शानदार आयोजन किया गया।
मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए विख्यात शिक्षाविद एवं केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने उपस्थित शिक्षाविदों एवं साहित्यकारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि हम महान राष्ट्र ऋषि स्वामी दयानंद की 200 वी. जयंती वर्ष पर आपको सम्मानित करते हुए स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे है | स्वामी दयानंद सरस्वती ने जाति, धर्म, संप्रदाय से ऊपर उठकर सामाजिक कुरीतियों को मिटाकर सभी से अखण्ड भारत के निर्माण में जुटने का आवाहन किया ।
महर्षि दयानंद सभागार में आयोजित “वसुधैव कुटुंबकम” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं “भारत विभूति सम्मान-2024” का शुभारम्भ मुख्य अतिथि महामहिम राज्यपाल केरल, श्री वैंकटेश्वरा समूह अध्यक्ष डा. सुधीर गिरि, साहित्य परिषद के अध्यक्ष डा. पवनपुत्र, प्रति कुलाधिपति डॉ. राजीव त्यागी, गुरुकुल चोटीपुरा की मुख्य प्रशासिका आचार्य डा. सुमेधा दीदी, अखिल भारतीय साहित्य परिषद के जिलाध्यक्ष डॉ. यतीन्द्र कटारिया आदि ने सरस्वती माँ की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्वलित करके किया ।
इस अवसर पर भारत सरकार की सलाहकार डा. शालिनी सिंह, प्रधान सलाहकार प्रो. वी.पी.एस. अरोड़ा, कुलपति प्रो. (डॉ.) कृष्णकांत दवे, कुलसचिव डा. पीयूष पांडेय, आर्ट ऑफ लिविंग की माधवी सिंह, डा. राजेश सिंह, डा. दिव्या गिरधर, एस.एस. बघेल, अरुण गोस्वामी, डा. योगेश्वर सिंह एवं मेरठ परिसर से डॉ. प्रताप सिंह और मीडिया प्रभारी विश्वास राणा आदि लोग उपस्थित रहे |



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