33 नए कुष्ठ रोगी खोजे गए, 44 रोगियों का डेटा दिल्ली और चंडीगढ़ से मिला
- जिले में कुल 123 कुष्ठ रोगियों को दिया जा रहा है उपचार
- भौतिक सत्यापन के साथ ही कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग में लगीं टीम
गाजियाबाद 14 फरवरी (2024) । जिले में कुष्ठ रोगी खोज अभियान के अंतर्गत 33 नए मरीज खोजे गए हैं। इसके बाद अप्रैल, 2023 से अब तक खोजे गए कुष्ठ रोगियों की संख्या बढ़कर 123 पहुंच गई है। इनमें दिल्ली से उपचार प्राप्त कर रहे 43 और चंडीगढ़ से उपचार प्राप्त कर रहे एक रोगी का आंकड़ा भी शामिल है। यह रोगी गाजियाबाद में रहते हैं लेकिन उपचार दिल्ली और चंडीगढ़ से ले रहे थे। जिला कुष्ठ रोग अधिकारी डा. अमित विक्रम ने बताया वहां से डेटा प्राप्त होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इन रोगियों का भौतिक सत्यापन करने के साथ ही कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग का काम शुरू कर दिया है, साथ ही रोगियों के परिजनों को प्रीवेंटिव दवाएं भी दी जा रही हैं। जिले में 11 पुराने रोगियों का भी उपचार चल रहा है।
जिला सर्विलांस अधिकारी (डीएसओ) और उप जिला कुष्ठ रोग अधिकारी डा. राकेश कुमार गुप्ता ने बताया - स्वास्थ्य विभाग ने कुष्ठ रोगियों के करीबी 10-10 संपर्कों वालों की जांच करना शुरू कर दिया है, ताकि संपर्क में रहने वाले यदि किसी व्यक्ति में संक्रमण हो तो समय से उसका भी उपचार शुरू किया जा सके, हालांकि रोगी के परिवार के सभी सदस्यों को प्रीवेंटिव दवाएं दी जाती हैं। डा. राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि कुष्ठ रोगियों से स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर संपर्क कर रही हैं। उन्होंने बताया जिले के त्वचा रोग विशेषज्ञों से मिले डेटा और विशेष स्क्रीनिंग अभियान के जरिए 33 नए रोगियों की पुष्टि हुई है। सभी का उपचार शुरू कर दिया गया है।
डा. गुप्ता ने बताया - दिल्ली और चंडीगढ़ से मिले रोगियों के डेटा को शामिल करके जिले में कुल 123 सक्रिय कुष्ठ रोगी हो गए हैं। इनमें शहरी क्षेत्र में 52, लोनी शहर में 22, लोनी ग्रामीण में आठ, रजापुर ब्लॉक में नौ, मुरादनगर शहर में आठ, मुरादनगर ग्रामीण में तीन, मोदीनगर में एक, भोजपुर ग्रामीण में नौ और खोड़ा में एक मरीज सक्रिय है।
संक्रामक है कुष्ठ रोग
उप जिला कुष्ठ रोग अधिकारी ने बताया कि कुष्ठ दीर्घकालीन संक्रामक रोग है, जो माइक्रो बैक्टीरियम लेप्री नामक जीवाणु से फैलता है। यह हाथ-पैरों की परिधीय तंत्रिका, त्वचा, नाक की म्यूकस और श्वसनतंत्र के ऊपरी हिस्से को प्रभावित करता है। यदि कुष्ठ रोग की पहचान और उपचार शीघ्र न हो तो यह स्थाई विकलांगता का कारण बन जाता है।


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