शिक्षक सम्मेलन में संस्कृत साहित्य के महत्वपूर्ण मुददों पर गहराई से हुई चर्चा
मेरठ। चौधरी चरण विवि के अटल बिहारी वाजपेयी सभागार में भारतीय ज्ञान परम्परा केन्द्रं और संस्कृत भारती मयराष्ट्रम् द्वारा आयोजित 'संस्कृत - अनुरागी - शिक्षक सम्मेलन ' में संस्कृत साहित्य के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहराई से चर्चा की गई । सम्मेलन का उद्देश्य था राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्षेत्र में संस्कृत साहित्य के महत्व को बढ़ावा देना और उसकी वर्तमान प्रासंगिकता को समझाना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के परिचय एवं स्वागत का कार्यक्रम से हुआ। सर्वप्रथम कार्यक्रम के संचालक संदीप ने कार्यक्रम की रूपरेखा रखी एवं प्रो राजेंद्र कुमार पांडेय, विभागाध्यक्ष, राजनीति विज्ञान विभाग ने सभी अतिथियों का परिचय कराया तत्पश्चात विनायक हेगड़े ने संस्कृत भारती का परिचय दिया और उसके द्वारा किए जा रहे व्यापक कार्यों को उल्लेखित किया, तदोपरांत प्रो वाचस्पति मिश्र ने संस्कृत सप्ताह के अवसर किए जा रहे कार्यों का उल्लेख किया। प्रो पवन कुमार शर्मा जो की कार्यक्रम के सूत्रधार रहे, ने संस्कृत वांग्मय में ज्ञान को उद्घाटित किया तथा पश्चिमी विद्वानों द्वारा भारतीय ज्ञान का लोहा मानने वाले विद्वानों के विचारो को रखा।
मुख्य वक्ता जयप्रकाश , अखिल भारतीय सह-संघटन मन्त्री, ने अपने उद्बोधन में महत्वपूर्ण विचारों को प्रस्तुत किया। उसमे उन्होंने संस्कृत को आम बोलचाल की भाषा बनाने के लिए क्या प्रयास किए जा सकते है, की विवेचना की एवं संस्कृत भारती का ध्येय संस्कृत को संभाषण से शास्त्र तक ले जाने को सबके समक्ष रखा।
मुख्य वक्ता प्रो संजीव कुमार शर्मा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में संस्कृत में साहित्य से अतिरिक्त विभिन्न आयामों को सभी के समक्ष रखा। उनकी संस्कृत भाषा के ज्ञान और धारा प्रवाह संस्कृत को सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध हुए। तदुपरांत सभी का धन्यवाद ज्ञापन एवं सूक्ष्म जलपान के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।



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