दुर्लभतम श्रेणी के बॉम्बे ब्लड ग्रुप वाले मरीज को बचाया

  उसी ग्रुप के भाई ने बहन को खून देकर दिलाई नयी जिंदगी 

मेरठ।  अभी तक आपने ए ,बी ओ ग्रुप के मरीजों को खून देते हुए सुना होगा। मेरठ के न्यूटिमा अस्पताल में सहारनपुर के एक महिला मरीज  के शरीर में  दुर्लतम श्रेणी के  बॉम्बे ब्लड ग्रुप मिला । चिकित्सकों ने परिवार के अन्य सदस्यों के खून की जांच करायी । जिसमें परिवार के सदस्य को उसी ग्रुप का खून चढा कर महिला को नयी जिदंगी देकर उसकी जान बचाई है। मरीज अब पूरी तरह फिट होकर अपने घर जा चुका है। 

न्यूटिमा हॉस्पिटल के संचालक एवं वरिष्ठ गुर्दा रोग एवं गुर्दा प्रतियारोपन विशेषज्ञ डॉ संदीप कुमार गर्ग एवं न्यूटिमा ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. श्वेता गर्ग एवं सहायक प्रभारी डॉ. अन्शुमान शर्मा संयुक्त रूप् से जानकारी देते हुए बताया कि  सहारनपुर निवासी महिला मरीज प्रसव के बाद की जटिलताओं और गंभीर एनीमिया के कारण विभिन्न राज्यों के उच्च संस्थानों / अस्पतालों में भटकने के पश्चात दिनांक 1 अगस्त को प्रसव की जटिलताओं और 7 ग्राम/डेसीलीटर से कम हीमोग्लोबिन के साथन्यूटिमा ब्लड बैंक में आई थी। खून की अत्यजिक आवश्यकता के लिए मरीज का सैंपल उसी दिन न्यूटिमा ब्लड बैंक में आ गया था । न्यूटिमा ब्लड बैंक की रिसर्च टीम ने अत्याधुनिक मशीनों के द्वारा ब्लड की जाँच की तो पाया कि यह एक दुर्लभतम श्रेणी का ब्लड ग्रुप था तत्काल पहचान किये गए दुर्लभतम ब्लड ग्रुप के सम्बन्ध में पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ़ चाइल्ड हेल्थ (पीजीआइसीएच), सेक्टर 30, नोएडा में ट्रांसफ्यूज़न मेडिसिन रेफरेंस लैब (सरकारी संस्थान) से परामर्श किया गया।

न्यूटिमा ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. श्वेता गर्ग के नेतृत्व में न्यूटिमा ब्लड बैंक के सहायक प्रभारी डॉ. अन्शुमान शर्मा स्वय ब्लड ग्रुप की पुष्टि के लिए तत्काल ब्लड सैंपल लेकर पीजीआइसीएच नोएडा के लिए निकल गए। पीजीआइसीएच के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सत्यम अरोड़ा ने बोम्बे ब्लड ग्रुप की पुष्टि की और डॉ. सत्यम अरोड़ा के मार्गदर्शन और न्यूटिमा ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. श्वेता गर्ग और सहायक प्रभारी डॉ. अन्शुमान शर्मा के सामूहिक निर्णय से न्यूटिमा ब्लड बैंक की टीम ने काल "बोम्बे ब्लड ग्रुप" के डोनर की तलाश उसी मरीज के परिवार में ही शुरू कर दी क्यूंकि मरीज बहुत गंभीर अवस्था में थी । इस बीच डॉ. सत्यम अरोड़ा ने मुंबई में 2 यूनिट कि भी व्यवस्था कर ली थी | सोभाग्य से मरीज के भाई की पहचान भी न्यूटिम ब्लड बैंक के द्वारा  उसी दुर्लभतम श्रेणी के ब्लड ग्रुप से हुई और उसने अपनी बहन को न्यूटिमा ब्लड बैंक में रक्त दान किया | मरीज पर रक्त चढ़ाने का असर हुआ और अब उसकी हालत पहले से बेहतर है।

डॉ. सत्यम अरोड़ा ने बताया की "बॉम्बे ब्लड ग्रुप" एक बहुत ही दुर्लभ ब्लड ग्रुप है, जिसकी नाम 1952 मरीजो में लक्षण के बाद रखा गया था।  यह ग्रुप कुल  मानव आबादी में 0.0004% घटना होती है और मुंबई में कुछ विशिष्ट आबादी में इसकी घटना 10,000 में 1 (0.01%) तक होती है। इस रक्त समूह के पास आधान सेवाओं के लिए एक बहुत ही अनोखी चुनौती है क्यूंकि इन रोगियों कि किसी अन्य रक्त समूह का रक्त नहीं चढ़ाया जा सकता है। मतलब केवल "बॉम्बे ब्लड ग्रुप" की रक्त इकइयों को बॉम्बे ब्लड ग्रुप में ट्रांसफ्यूज किया जा सकता है। "बॉम्बे ब्लड ग्रुप" वाला मरीज़ होना दुर्लभ है और बॉम्बे : ग्रुप डोनर ढूँढना और भी मुश्किल है"।

ट्रांसफ्यूज मेडिसिन एवं ब्लड बैंक के क्षेत्र में न्यूजिमा ब्लड बैंक पछले 4 वर्षों के अपने अनुभव से दुर्लभतम ब्लड ग्रुप जैसे नित नए आयाम गढ़ने के साथ-साथ अति उन्नत और नवीनतम तकनीक का इस्तेमाल करके उन्नति के पथ पर अग्रसर है। 

 इस ब्लड ग्रुप का खून किसी भी ब्लड बैंक में नहीं रखा जाता 

 डा संदीप गर्ग ने बताया इस प्रकार के ग्रुप का खून हर ब्लड बैंक में नहीं रखा जाता है। इसका कारण यह ग्रुप दस हजार में एक में निकलता है।न्यूटिमा में इस प्रकार का मरीज पहली बार आया है। इस  ग्रुप का ब्ल्ड   वंशुनागत होता है। इस प्रकार के केस कम ही निकलते है। 

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