जीवनशैली में सुधार से कैंसर की हार

भारत में कैंसर के बढ़ते मामले आम जनता के साथ विशेषज्ञों के लिये भी चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। टाटा मेमोरियल कैंसर रिसर्च इस्टीच्यूट मुबंई के मुताबिक, हर साल देश में 10 लाख से लेकर 13 लाख तक मामले कैंसर मरीज़ों के सामने आते हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, कैंसर सैकड़ों तरह का होता है और इनके लक्षण भी अलग-अलग होते हैं। जिक्र कैंसर के प्रमुख प्रकार ओरल कैंसर का ही करें तो बीते कुछ सालों में जिस रफ्तार से मुंह के कैंसर के मामले बढ़े हैं, उसने इसके विभिन्न कारणों पर और ज्यादा गौर करने की जरूरत पर बल दिया है।
आहार-विहार की विकृतियां
देश में सबसे ज्यादा मामले ओरल कैंसर के सामने आ रहे हैं। जिसमें से अधिकतर का कारण तंबाकू या बीड़ी-सिगरेट का सेवन है। इसके अलावा खराब डाइट का कैंसर के बढ़ने के कारणों में एक बड़ा योगदान है। वहीं तेजी से शहरीकरण व सुस्ती भरा लाइफस्टाइल ब्रेस्ट कैंसर को बढ़ावा दे रहा है। इसी के साथ देर से शादी और देर से बच्चे पैदा करना या बर्थ कंट्रोल जैसे चलन हावी हुए।
राहत की बात
करीब 10 साल पहले सर्विक्स कैंसर के सबसे ज्यादा मामले महिलाओं में देखे जाते थे लेकिन हाईजीन और जागरूकता बढ़ने के बाद अब इन मामलों में कमी देखने को मिल रही है। दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों में पीएचसी, ईएसआई अस्पताल खुलने और डॉक्टरी सेवाएं मिलने से भी मरीज़ों को वक्त रहते लक्षण पता चल जाते हैं। दूसरी तरफ पंचायतें, स्थानीय निकाय, आंगनवाड़ी और आशा वर्कर्स भी अवेयरनेस फैलाने में बड़ी भूमिका अदा कर रहे हैं। मुंबई के टाटा मेमोरियल कैंसर हॉस्पिटल और डीईए के प्रोजेक्ट डायरेक्टर व नोडल ऑफिसर डॉक्टर गणेश कहते हैं कि 2012 के बाद महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर सबसे कॉमन कैंसर के तौर पर देखने को मिल रहा है।
आनुवांशिक और मोटापे के जोखिम
ब्रेस्ट कैंसर के मामले में डॉ़क्टर फैमिली हिस्ट्री यानी आनुवंशिकता पर जोर देते हुए इसे बड़ा कारण मानते हैं। डाक्टर के मुताबिक, जीन म्यूटेशन, देर से संतान होना या जल्दी मेनोपॉज होना व मोटापा इसके बड़े कारण हैं। दरअसल, मोटापे के कारण ब्रेस्ट डेंसिटी बढ़ने से कैंसर टिशूज़ बढ़ने का खतरा रहता है। वहीं बॉडी मास इंडेक्स बहुत मायने रखता है। क्योंकि हेल्दी व्यक्ति का बीएमआई 18.5-25 के बीच होता है। इससे ऊपर बीएमआई हो तो व्यक्ति मोटापाग्रस्त है और कैंसर का खतरा भी ज्यादा है। ओरल कॉन्ट्रसेप्टिव का देर तक इस्तेमाल भी खतरनाक है। कुछ लोग हारमोन रिप्लेसमेंट थैरेपी करवाते हैं। खासकर मेनोपॉज के बाद इस थैरेपी का सहारा लेते हैं, जो ब्रेस्ट कैंसर का बड़ा कारण बनती है। बच्चे पैदा न करना व शराब का सेवन भी बड़े कारण हैं। वहीं नवजात को ब्रेस्टफीड न करवाने से ब्रेस्ट कैंसर के चांस और बढ़ जाते हैं।
रोग की जड़ें
मोटापा बढ़ाकर कैंसर का खतरा पैदा करने में हमारे खानपान व अन्य दिनचर्या की बड़ी भूमिका है। इसमें ज्यादा फैट वाली और रिच डाइट लेना शामिल है तो कोई व्यायाम न करना व वजन नियंत्रित न रखना भी शुमार है। दरअसल अपने लाइफस्टाइल को सुधार कर मोटापे से होने वाले कैंसर से तो बचा ही जा सकता है।

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