संसद का शीतकालीन सत्र
चीन मुद्दे पर राज्यसभा में जोरदार हंगामा
कांग्रेस समेत कुछ विपक्षी दलों ने किया वाकआउट
नयी दिल्ली (एजेंसी)।
चीन के मुद्दे पर विपक्ष दल के नेताओं ने आज कार्यवाही शुरू होते ही राज्यसभा में हंगामा शुरू कर दिया और वॉकआउट कर गए। तवांग में चीनी अतिक्रमण के मुद्दे पर कार्यस्थगन नोटिस चेयरमैन जगदीप धनखड़ द्वारा खारिज किए जाने और चर्चा न कराने का विरोध करते हुए कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों के सदस्यों ने सोमवार को शून्यकाल के दौरान राज्यसभा से बहिर्गमन किया।
इससे पहले, धनखड़ ने मामले पर अपना फैसला पढ़ते हुए कहा कि सदस्यों द्वारा दिए गए नोटिस नियम 267 के अनुपालन में नहीं हैं और उन्होंने कहा कि अगर नियमों के तहत होगा तो वह सदस्यों को सदन में कोई भी मामला उठाने की अनुमति देंगे।
वहीं, विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने नियम 267 के तहत इस मुद्दे पर चर्चा की मांग पर जोर देते हुए ब्रिटेन की संसद की एक कार्यवाही का हवाला देते हुए कहा कि यह सदन "एक पुरुष को महिला और एक महिला को पुरुष" में बदलने के अलावा कुछ भी कर सकता है। अध्यक्ष के पास स्थगन नोटिस स्वीकार करने के नियमों पर अवशिष्ट शक्तियाँ हैं।
इस पर सभापति ने फिर से नियम पर जोर देते हुए कहा कि विपक्ष के नेता ने जिस नियम 266 का उल्लेख किया है, वह केवल उन मुद्दों से संबंधित है, जिनका उल्लेख नोटिस में नहीं है और फिर से विपक्षी सदस्यों को संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने की अनुमति नहीं दी गई।
लोकसभा में उठा कश्मीरी पंडितों का मुद्दा
लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि आज कश्मीरी पंडित कश्मीर छोड़ रहे हैं। आतंकी कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाने के लिए उनके नामों की लिस्ट तैयार कर रहे हैं। ऐसे में सदन में जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए।
इसके अलावा, सांसद मनोज झा ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए राज्यसभा में नोटिस दिया है। चीन के साथ सीमा की स्थिति पर चर्चा के लिए कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव नोटिस दिया।कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने चीन के साथ सीमा की स्थिति पर चर्चा के लिए राज्यसभा में नियम 267 के तहत सस्पेंशन ऑफ बिजनेस नोटिस दिया।
चीन मसले पर विपक्ष को जयशंकर का जवाब
नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि हमें राजनीतिक आलोचना से कोई समस्या नहीं है, लेकिन हमें अपने जवानों का अपमान नहीं करना चाहिए। मैंने सुना है कि मेरी अपनी समझ को और गहरा करने की जरूरत है। जब मैं देखता हूं कि कौन सलाह दे रहा है तो मैं केवल सम्मान कर सकता हूं। हमारे जवानों के लिए 'पिटाई' शब्द का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। अगर हम चीन के प्रति उदासीन थे तो भारतीय सेना को सीमा पर किसने भेजा। अगर हम चीन के प्रति उदासीन थे तो आज चीन पर डी-एस्केलेशन और डिसइंगेजमेंट के लिए दबाव क्यों बना रहे हैं? हम सार्वजनिक रूप से क्यों कह रहे हैं कि हमारे संबंध सामान्य नहीं हैं? हमें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अपने जवानों की आलोचना नहीं करनी चाहिए। हमारे जवान यांग्त्से में 13 हजार फीट की ऊंचाई पर खड़े होकर हमारी सीमा की रखवाली कर रहे हैं। उनका सम्मान और सराहना की जानी चाहिए।



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