हिंसा आरोपियों के खिलाफ बुलडोजर एक्शन मामला

- यूपी सरकार ने सुप्रीमकोर्ट में दाख‍िल क‍िया जवाब
 बोली- कानून के तहत की गई है कार्रवाई
लखनऊ।
भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा के बयान के बयान के बाद प्रदेश के कई शहरों में भड़की ह‍िंसा के आरोप‍ियों की संपत्‍त‍ि पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई के मामले में यूपी सरकार ने आज सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया।
गौरतलब है कि बुल्डोजर कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग को लेकर जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीमकोर्ट में याचिका दाखिल कर रखी है। याचिका की सुनवाई में कोर्ट ने यूपी सरकार से जवाब मांगा था।
यूपी सरकार ने जवाब में सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हाल ही में राज्य में की गई संपत्तियों को उचित प्रक्रिया के बाद गिराया गया था और इसका दंगा करने के आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने से कोई लेना-देना नहीं था। सरकार ने अलग-अलग कानूनों के अनुसार दंगाइयों के खिलाफ कार्रवाई की है।
इसके अलावा यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी कहा है कि याचिकाकर्ता जमीयत उलमा-ए-हिंद ने चुनिंदा मीडिया रिपोर्टों को चुना है और उनके द्वारा लगाए गए आरोप झूठे हैं। सरकार ने सुप्रीमकोर्ट से याचिका खारिज करने का भी आग्रह किया है।
बता दें क‍ि प्रदेश में बीते दो जुमा को भड़की ह‍िंंसा के आरोपियों की संपत्तियों पर भी बुलडोजर चलाया गया। सरकार की इस कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए सीधा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। जमीयत उलेमा-ए-हिंद की अर्जी पर की न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ सुनवाई की थी। सुप्रीम कोर्ट ने योगी आदित्यनाथ सरकार से तीन दिनों में जवाब दाखिल करने को कहा था। इसके साथ ही बुलडोजर एक्शन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि सभी कार्रवाई कानूनी दायरे में होनी चाहिए। उन्होंने कहा था कि यूपी अर्बन प्लानिंग एंड डिवेलपमेंट एक्ट, 1973 के मुताबिक भी बिल्डिंग मालिक को 15 दिन का नोटिस और अपील दायर करने के लिए 30 दिन का समय देना जरूरी है। नियम में तो 15 दिनों से 40 दिनों तक का समय देने की बात नियम में कही गई है, जिसमें कम से कम 15 दिनों तक किसी भी कार्रवाई करने से पहले इंतजार करना होता है।

No comments:

Post a Comment

Popular Posts