सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शाहपुर में टीबी के 19 मरीजों को बांटा पोषाहार
दो हफ्ते से ज्यादा खांसी होने पर चिकित्सक की सलाह लें : डॉ. एनपी सिंह
मुजफ्फरनगर, 18 मई 2022।
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत ब्लॉक शाहपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर बुधवार को टीबी से ग्रसित 19 मरीजों को अग्रवाल ट्रेडर्स द्वारा पोषाहार वितरित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. नरेद्र प्रताप सिंह ने की। उन्होंने बताया - दो हफ्ते से ज्यादा खांसी होने पर चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। दवा का पूरा कोर्स लेना चाहिये। हर बार खांसने या छींकने से पहले मुंह को कपड़े से ढक कर रखें अथवा मास्क पहनें। मरीजों को हवादार व रोशनी वाले कमरे में रहना चाहिये। पौष्टिक खाना खाएं, एक्सरसाइज व योग करें। बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, तंबाकू, शराब आदि से परहेज करें। भीड़-भाड़ वाली और गंदगी भरी जगहों पर जाने से बचें।
जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डा. लोकेश गुप्ता ने बताया टीबी का उपचार बीच में छोड़ देने पर मल्टी ड्रग रजिस्टेंस (एमडीआर) टीबी हो जाती है। इसलिए कहा जाता है कि एक बार टीबी का उपचार शुरू होने पर बीच में दवा खाना न छोड़ें। चिकित्सक की सलाह पर ही दवा लेना बंद करें। एमडीआर टीबी पीड़ितों का उपचार थोड़ा कठिन और लंबा हो जाता है, हालांकि आजकल स्वास्थ्य विभाग के पास एमडीआर का भी निशुल्क उपचार उपलब्ध है। ऐसे मरीजों को अतिरिक्त देखरेख की जरूरत होती है, इसलिए उन्होंने खुद एमडीआर टीबी से ग्रसित तीन बच्चों को गोद लिया है। उन्होंने बताया इस संबंध में विभिन्न संगठन सहयोग के लिए आगे आ रहे हैं और टीबी से ग्रसित बच्चों को गोद ले रहे हैं।
सीएचसी शाहपुर प्रभारी डॉ. नरेद्र पाल सिंह ने बताया- अग्रवाल ट्रेडर्स ने बुधवार को 19 टीबी रोगियों के लिए पोषाहार वितरण का बंदोबस्त किया था। शासन के दिशा निर्देश पर मरीजों को बिस्कुट, दलिया, खिचड़ी, फल, चना, दाल आदि के पैकेट दिए गए।
उन्होंने बताया सरकार ने सन् 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। मरीजों को मुफ्त दवा के साथ उपचार जारी रहने तक पोषण के लिए निक्षय पोषण योजना के तहत हर महीने पांच सौ रुपये दिए जाते हैं। यह राशि मरीज के खाते में सीधे ट्रांस्फर की जाती है। टीबी के मरीजों का इम्युनिटी सिस्टम अन्य मरीजों की तुलना में कमजोर होता है। इसकी वजह से यह मरीज अक्सर कुपोषण का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में उनका उपचार कराने में लंबा समय लग जाता है। इसको देखते हुए अब स्वास्थ्य विभाग की सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर टीबी मरीजों को पोषण सामग्री देने की योजना बेहद कारगर साबित हो रही है।


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