यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य जागरूकता दिवस (12 फरवरी) आज
किशोरियों को शारीरिक बदलाव और माहवारी प्रबंधन पर जागरूक करना जरूरी : डा. रेखा शर्मा
-          शिक्षण संस्थानों में उम्र के मुताबिक किशोरियों की काउंसलिंग की हो व्यवस्था

   
हापुड़, 11 फरवरी,2022। बेहतर प्रजनन स्वास्थ्य के लिए किशोरियों को उनके शारीरिक बदलाव और माहवारी प्रबंधन के बारे में जागरूक किया जाना जरूरी है। सीधे शब्दों में कहा जाए तो प्रजनन स्वास्थ्य की नींव किशोरावस्था में ही पड़ती है। इस अवस्था में होने वाली मामूली सी परेशानियां जानकारी के अभाव में आगे चलकर विकराल रूप ले सकती हैं। पेल्विक इंफेक्शन (पीआईडी) की ही बात करें तो सही समय पर चिकित्सक के परामर्श से इसका उपचार मुश्किल नहीं है, लेकिन चिकित्सकीय परामर्श और उपचार में होने वाली देरी बांझपन और सर्विकल कैंसर का कारण बन सकती है। इसके लिए जरूरी है कि उम्र के मुताबिक किशोरियों की शिक्षण संस्थानों में ही काउंसलिंग की व्यवस्था हो। समय-समय पर चिकित्सकीय परामर्श भी उपलब्ध कराया जाए। यह बातें शुक्रवार को स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डा. रेखा शर्मा ने कहीं।
डा. रेखा ने बताया यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर वर्ष १२ फरवरी को यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य जागरूकता दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा प्रजनन स्वास्थ्य एक बहुत ही महत्वपूर्ण और गंभीर विषय है, लेकिन समाज में इस विषय पर खुलकर बात न हो पाने की वजह से गलत धारणा और स्पष्ट दृष्टिकोण के अभाव में महिलाओं को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य जागरूकता दिवस के आयोजन का उद्देश्य उपलब्ध परिवार नियोजन सुविधाओं की जानकारी देने के साथ ही महिलाओं को यह जानकारी देना है कि स्वस्थ गर्भावस्था और सुरक्षित प्रसव का मूल आधार क्या है।
इस दिन के आयोजन का एक बड़ा उद्देश्य यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) की रोकथाम के लिए समाज में जागरूकता बढ़ाना है। माहवारी प्रबंधन और हाईजीन के बारे में जानकारी देने के लिए इन विषयों पर बात करना जरूरी है। खासकर किशोरियों को शारीरिक बदलाव और माहवारी के बारे में तथ्यपरक जानकारी देकर भविष्य में आने वाली तमाम परेशानियों से बचाया जा सकता है। डा. रेखा शर्मा ने बताया माहवारी के दौरान साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है। साफ सफाई के लिए सेनेटरी नेपकिन का इस्तेमाल करें और ध्यान रहे कि नेपकिन को छह से आठ घंटे में जरूर बदल लें, अन्यथा यह संक्रमण का कारण बन सकता है। 
बात साफ-सफाई की हो, या फिर बेहतर पोषण की, बेहतर प्रजनन स्वास्थ्य के लिए किशोरावस्था से सावधानी बरतनी जरूरी है। इसलिए राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत भी माहवारी प्रबंधन और पोषण के बारे में जानकारी दी जाती है। जानकारी के अभाव में माहवारी प्रबंधन में लापवाही बरतने पर जहां संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है वहीं बेहतर पोषण के अभाव में किशोरियों को आगे चलकर गर्भावस्था के दौरान गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। १५ से १८ वर्ष की आयु वर्ग की किशोरियों को रोजाना २२०० कैलोरी ऊर्जा की जरूरत होती है। 
 
१५ से १९ वर्ष की ५५ प्रतिशत किशोरियां एनीमिक :
जनपद में नेशनल फैमिली हैल्थ सर्वे (एनएफएचएस) - पांच के मुताबिक १५ से १९ वर्ष की ५५.७ प्रतिशत किशोरियों में खून की कमी (एनीमिक) है। वर्ष २०१९-२१ के दौरान हुए इस सर्वे में सामने आया है कि जनपद में १५ से ४९ वर्ष आयु वर्ग की ५०.७ प्रतिशत महिलाएं एनीमिक हैं। प्रजनन स्वास्थ्य के प्रति उदासीनता की एक बानगी यह भी है कि सर्वे के मुताबिक जनपद में १०० दिनों से अधिक आयरन और फोलिक एसिड की गोलियां लेने वाली गर्भवती २९ फीसदी और १८० दिनों तक आयरन और फोलिक एसिड लेने वाली गर्भवती मात्र १२.६ प्रतिशत रहीं। 
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पेल्विक इंफेक्शन (पीआईडी) के लक्षण :

- पेट के निचले हिस्से के आसपास दर्द।
- सेक्स के दौरान असुविधा या दर्द जो पेल्विक के अंदर गहराई से महसूस होता है।
- पेशाब के दौरान दर्द होना।
- पीरियड्स के बाद और सेक्स के बाद ब्लीडिंग।
- मासिक में अत्यधिक रक्तस्राव, दर्दनाक पीरियड। 

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