छात्रों, शिक्षकों और शोध छात्रों का विनिमय करने पर बनी सहमति
मेरठ। आईआईएमटी विश्वविद्यालय में शुक्रवार को क्यूबा के भारत में नियुक्त राजदूत एलेजांद्रो सिमंकास मारिन का आगमन हुआ। राजदूत ने छात्रों से सीधे बात करते हुए क्यूबा और भारत के आर्थिक, सांस्कृतिक, सामरिक, शैक्षणिक और व्यापारिक संबंधों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कुलपति डाॅ एचएस सिंह ने रशियन भाषा में क्यूबा के राजदूत का स्वागत किया। आईआईएमटी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति योगेश मोहनगुप्ता, कुलपति डाॅ एचएस सिंह, रिसर्च एंड डेवलपमेंट विभाग की डीन प्रोफेसर दीपा शर्मा और क्यूबाई राजदूत के मध्य शैक्षणिक कार्यक्रमों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। आईआईएमटी कुलाधिपति ने क्यूबाई राजदूत को आश्वस्त किया कि वे मिलकर दोनों देशों के स्नातक, परा-स्नातक और शोध छात्रों के लिए बेहतर प्लेटफाॅर्म मुहैया कराएंगे। आईआईएमटी के विजन, मिशन से लेकर पाठ्यक्रमों, प्रबंधन, शोध और प्लेसमेंट की विस्तृत जानकारी क्यूबा के राजदूत को दी गई। क्यूबा की लाऊर्डेस एग्युलेरा, अबेल अबेल्ला और मिशन की डिप्टी हेड मेलाना रोजास डिना भी कार्यक्रम में मौजूद रहीं।
छात्रों को संबोधित करते हुए राजदूत एलेजांद्रो सिमंकास मारिन ने भारत और क्यूबा के संबंधों पर बात करते हुए उपनिवेशवाद के खिलाफ दोनों देशों के आजादी के संघर्ष को एक समान बताया। उन्होंने फिडेल कास्त्रो के नेतृत्व में क्यूबा की आजादी की लंबी लड़ाई के बारे में बताते हुए सभी छात्रों और शिक्षकों को भविष्य में क्यूबा में देखने की इच्छा जाहिर की। अपने संबोधन में क्यूबा की खासियत बताते हुए राजदूत एलेजांद्रो ने क्यूबा का सिगार निकाल कर दिखाया और दावा किया कि उनके देश के सिगार पूरी दुनिया के सबसे बेहतरीन सिगार होते हैं। साथ ही भारत में मिलने वाले फलों का जिक्र करते हुए बताया कि क्यूबा में भी भारत के ही जैसे फल-सब्जियां मिलती हैं।
क्यूबा के चिकित्सा विज्ञान की तारीफ करते हुए उन्होंने बताया कि कोरोना के खिलाफ क्यूबा ने भी अपना टीका विकसित किया है। इससे पहले 2005 में पाकिस्तान और कुछ ही सालों पहले नेपाल में आए भूकंप में मदद के लिए क्यूबा से कई हजार चिकित्सकों की टीम ने मदद पहुंचाई। भारत के क्यूबा से पुराने रिश्तों को दोहराते हुए उन्होंने बताया कि 1960 में फिडेल कास्त्रो के भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और बाद में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से दोस्ताना संबंध थे। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग का रवैया रहा है।
इस मौके पर मंच पर आए पूर्व आईएएस और बाद में समाज सेवा में उतरे कामरेड प्रभात राय ने बताया कि उपनिवेशवाद के खिलाफ क्यूबा और भारत के संघर्ष की कहानी काफी हद तक एक जैसी है। उन्होंने दावा किया कि क्यूबा के असली हीरो चे ग्वेरा दरअसल भारत के लिए भी एक प्रेरणा रहे हैं।
आईआईएमटी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति योगेश मोहन  गुप्ता ने क्यूबा के राजदूत से भारत और क्यूबा के मित्रवत संबंधों पर चर्चा की। कार्यक्रम में कुलपति डाॅ एचएस सिंह, प्रोवीसी डाॅ सतीश बंसल और डीन,  डायरेक्टर और प्रिंसिपल समेत वरिष्ठ शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र मौजूद रहे।
प्रो वीसी डाॅ सतीश बंसल ने आगन्तुकों का आभार जताते हुए विश्वविद्यालय की ओर से उनका आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ फरहा ने सफलता पूर्वक किया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में कुलसचिव डाॅ वीपी राकेश, डायरेक्टर एडमिन डाॅ संदीप कुमार और डाॅ सुगन्धा श्रोत्रिय का विशेष योगदान रहा।

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