मुजफ्फरनगर, 10 दिसम्बर 2021।प्रजनन स्वास्थ्य के अंतर्गत वर्तमान स्थिति को देखते हुए पुरुष नसबंदी अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह एक मामूली शल्य प्रक्रिया है तथा महिला नसबंदी की तुलना में अधिक सरल और सुरक्षित है। पुरुष नसबंदी पखवाड़े पर यह बात मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डा. महावीर सिंह फौजदार ने कही। उन्होंने बताया -पुरुष नसबंदी पखवाड़े के अतंर्गत स्वास्थ्य विभाग लोगों में जागरूकता के लिए प्रचार-प्रसार में जुटा है। उसका सफल परिणाम भी देखने को मिल रहा है। महिला-पुरुषों में जागरूकता देखने को मिल रही है। पखवाड़े में अबतक 20 पुरुष नसबंदी करा चुके हैं। शुक्रवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र खतौली पर दो पुरुषों ने स्वेच्छा से नसबंदी करायी।
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं परिवार नियोजन कार्यक्रम की नोडल अधिकारी डा. दिव्या वर्मा ने बताया शुक्रवार को सीएचसी खतौली पर दो पुरुष नसबंदी हुई, अब तक खतौली सीएचसी पर 11 पुरुष नसबंदी हो चुकी है। पुरुष नसबंदी पखवाड़े के तहत अब तक 20 सफल पुरुष नसबंदी की गई। उन्होंने कहा - सीएचसी खतौली पर हुए बेहतरीन कार्य के लिए डा. अजीत कुमार व उनकी पूरी टीम बधाई की पात्र है। इसके साथ ही मलिन बस्तियों में जाकर PSIU यूनिय से विपिन और अर्बन कॉर्डिनेटर कमल ने पुरुष नसबंदी के बरे में समझाया। तथा शहरी क्षेत्र में एएनएम पूनम चौधरी व आशा रंजना का सहयोग मिल रहा है।
खतौली सीएचसी प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. अवनीश ने बताया पुरुष नसबंदी, महिला नसबंदी की तुलना में काफी आसान और सुरक्षित है। यह प्रक्रिया बिना चीरा एवं टांके के बहुत कम समय में ही पूरी हो जाती है। उसके बाद लाभार्थी आराम से घर जा सकते हैं। सभी सरकारी अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पुरुष नसबंदी की सुविधा निशुल्क उपलब्ध है। पुरुषों की यह नैतिक ज़िम्मेदारी भी है कि वह अन्य कार्यों की ही तरह परिवार नियोजन कार्यक्रम में भी आगे बढ़कर जिम्मेदारी निभाएं। पुरुष नसबंदी के लिए लाभार्थी को 3000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। जो लाभार्थी के खाते में सीधे ट्रांसफर की जाती है। इसी प्रकार महिला नसबंदी कराने पर लाभार्थी के खाते में सरकार की ओर से दो हजार रुपए का भुगतान किया जाता है।

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