सुप्रीमकोर्ट ने खारिज किया कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला
नई दिल्ली (एजेंसी)।सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को दरकिनार कर दिया, जिसमें पश्चिम बंगाल में काली पूजा, दिवाली, छठ पूजा, जगाधत्री पूजा, गुरु नानक जयंती, क्रिसमस और नए साल के पूर्व संध्या पर होने वाले जश्न के दौरान पटाखों के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था।
जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस अजय रस्तोगी की अवकाश पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही उन पटाखों के उपयोग को विनियमित करने का आदेश पारित कर दिया है जिनमें प्रदूषणकारी सामग्री का उपयोग होता है। पीठ ने कहा कि पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं हो सकता है।
पीठ ने टिप्पणी की, 'अलग-अलग तरह के लोग हो सकते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पूर्ण प्रतिबंध हो। हमें बेरियम साल्ट जैसे प्रतिबंधित पदार्थ के उपयोग के खिलाफ तंत्र को मजबूत करना होगा। पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं हो सकता।'
कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस आधार पर पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था कि कार्यपालिका के लिए उल्लंघन करने वालों की पहचान करना और उनके खिलाफ कार्रवाई करना व्यावहारिक रूप से असंभव होगा क्योंकि हरित पटाखों को अलग करने के लिए कोई तंत्र नहीं है और कानून को लागू करने वाली एजेंसियों के लिए असंभव कार्य है।
पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत का आदेश सभी राज्यों पर समान रूप से लागू होता है और पश्चिम बंगाल अपवाद नहीं हो सकता। शीर्ष अदालत ने कहा, 'यह कोई नया मुद्दा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही आदेश पारित कर चुका है। इसे समान रूप से लागू किया जाना चाहिए।'

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