प्रकृति के बनाये नहीं होते
उसे समय और सम्मान
मिलकर बनाते हैं।
रिश्तों में धुंधलापन
धुंध और कुहांसे से नहीं
उपेक्षा की घटाओं के घिरने से होता है।
रिश्तों में मधुरता
किसी मीठे कण या शक्कर से नहीं
स्नेह भरे शब्दों से होता।
रिश्तों में अपनापन
किसी रासायनिक क्रिया से नहीं
मुक़म्मल ख्याल से होता है।
जब ये क्रियाएं ठप हों
तो सहज़ ही अंदाजा लगा लेना
समय की अंधी घुड़दौड़ में
रिश्ते काफी पीछे छूट गए।
इससे पहले कि कोई दूसरा
उसे अपने पैरों तले कुचले
आत्मसम्मान हेतु
समय की अंधी घुड़दौड़ से बाहर निकलकर
बोझिल ढाल-तलवार को किनारे रख
सादगी से अपनी डगर पर चलना चाहिए
जिसमें न कुचलने डर हो
न अभिमान का दंश।
- अवनीश यादव
इलाहाबाद विश्वविद्यालय




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