यथार्थ और स्वप्न" संदर्भ सांस्कृतिक पक्ष विषय पर मंथन सेमिनार आयोजित
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित आजादी का अमृत महोत्सव मंथन सेमिनार श्रृंखला के अंतर्गत"आजादी के 75 वर्ष और आगामी 25 वर्ष: यथार्थ और स्वप्न" संदर्भ सांस्कृतिक पक्ष विषय पर मंथन सेमिनार आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रतिकुलपति प्रो. वाई. विमला ने की। उन्होंने कहा कि हर विषय का साहित्य होता है विज्ञान विषय का भी अपना साहित्य है 75 वर्षों में देश में साहित्य की रचना की। प्रत्येक प्रांत का ऐतिहासिक पौराणिक संपन्नता की गाथाएं उस क्षेत्र का साहित्य होता है। साहित्य में एक बहुत बड़ा वर्ग दलित साहित्य के प्रभाव में आया है। आज के समय का एक बहुत बड़ा प्रश्न है भारतीय समाज में तेजी से पनपता अवसाद। आगामी 25 वर्षों में हमें ऐसे साहित्य का सृजन कर पाए जो सामाजिक संरचना को सुदृढ़ बनाए और अवसाद से निकाल पाए और मानवता का संरक्षण करें।
इस मौके पर विशिष्ट वक्ता प्रो. सत्यकाम, समकुलपति, इग्नू, ने कहा की साहित्य भविष्य मुखी होता है, साहित्य सच लिखता है। उन्होंने कहा कि जहां सामाजिक व्यवस्था समाजवादी ना होकर पूंजीवादी व्यवस्था में परिवर्तित होती है भारतीय सभ्यता संस्कृति भाषा का तेजी से पश्चिमीकरण होने के कारण भारत को इंडिया बना दिया जाता है। भीष्म साहनी, राही मासूम रजा जैसे कई साहित्यकार आजादी के बाद उत्पन्न हुई समस्याओं को अपने रचना कर्म में अभिव्यक्त करते हैं। विवेकी राय ने विकास की अवधारणा को सड़क से जोड़कर देखा कि गांव का विकास किस प्रकार से संभव हो। इस बारे में उन्होंने अपने उपन्यासों में लिखा आजादी के बाद स्त्री चिंतन बहुत व्यापक रूप में हमारे समक्ष आया प्रत्येक तबके की विशेष रूप से आर्थिक रूप से निम्न वर्ग की वर्ग की महिलाएं सशक्त रूप से विश्व पटल पर पल प्रभाव में आए। हिंदी साहित्य में एक बहुत बड़ा वर्ग स्त्री लेखिकाओं का हुआ जिन्होंने बहुत ही समृद्ध साहित्य की रचना की। जैनेंद्र आजादी से पूर्व और आजादी के पश्चात नई दृष्टि से रचना कर्म कर रहे थे। आगामी 25 वर्षों में जो साहित्य रचा जाएगा और निश्चित ही भारतीय संस्कृति और समाज की स्वर्णिम विकास का योग होगा भारतीय संस्कृति के मूल उच्च को समझना अपने अस्तित्व की पहचान है। भारतीय संस्कृति की जड़ें बहुत मजबूत है भारतीय साहित्य में जन जन की बात की जाती है और समाज साहित्य समाज का सच लेकर ही ही आगे बढ़ता है। इस दौरान अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे।
No comments:
Post a Comment