बढ़ेगा खिलाड़ियों का उत्साहः राकेश राठौर


जालंधर।
पूर्व रणजी खिलाड़ी व भाजपा पंजाब के उपाध्यक्ष राकेश राठौर ने कहा कि खेल रत्न का नाम ''मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार'' किए जाने से खेल, खिलाड़ी और पुरस्कार सबकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि इस गौरवमयी पुरस्कार को प्राप्त करने के इच्छुक खिलाड़ी भी अपने अपने खेल में उत्कृष्टता दर्ज करने के लिए सतत प्रयासरत होंगे, क्योंकि मेजर ध्यान चंद की उनकी खेल उपलब्धियों के साथ साथ उनकी अतुलनीय राष्ट्र भक्ति के लिए भी जाना जाता है।
उल्लेखनीय है कि 14 अगस्त 1936 को बर्लिन ओलंपिक में भारत और जर्मनी के बीच अंतिम हॉकी मैच खेला जाना था। लगातार बारिश के कारण उस दिन मैच नहीं खेला जा सका। लेकिन उस मैच के लिए लोगों की दीवानगी यह थी कि अगले दिन 15 अगस्त को जब मैच हुआ तो स्टेडियम खचाखच भरा हुआ था, उस समय जर्मन तानाशाह हिटलर भी वहां मौजूद था। मैदान की गीली जमीन पर मेजर ध्यानचंद बिना जूते पहने नंगे पांव खेले और जर्मनी को बुरी तरह हरा दिया।
मैदान पर नंगे पांव दौड़ रहे ध्यानचंद के खेल ने हिटलर जैसे तानाशाह को अपना दोस्त बना लिया। वह ध्यानचंद के खेल से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने जर्मनी के लिए खेलने के बदले उन्हें अपनी सेना में एक उच्च पद की पेशकश की, जिसको मेजर ध्यानचंद ने विनम्रता से यह कहते हुए ठुकरा दिया कि भारत उसका देश है जिसे वह अपनी जान से ज्यादा चाहते हैं। अंतिम समय तक भारत के लिए खेलना जारी रखेंगे।
इसे ध्यानचंद के व्यक्तित्व का ही असर कहें कि उनके प्रस्ताव को ठुकराने के बाद भी हिटलर जैसा तानाशाह उनसे नाराज नहीं हुआ और उन्होंने मेजर ध्यानचंद को 'हॉकी विजार्ड' की उपाधि दी थीं।

No comments:

Post a Comment

Popular Posts