भाजपा-कांग्रेस सहित 8 दलों पर सुप्रीमकोर्ट ने ठोका जुर्माना
राजनीतिक दल नींद से जगने को तैयार नहींः कोर्ट
 उम्मीदवारों का आपराधिक रिकार्ड सार्वजनिक न करने पर की कार्रवाई


नई दिल्ली (एजेंसी)। बिहार चुनाव में अपने-अपने उम्मीदवारों के आपराधिक रिकार्ड को सार्वजनिक न करने पर सुप्रीमकोर्ट ने भाजपा और कांग्रेस समेत 8 राजनीतिक दलों पर जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने भाजपा और कांग्रेस पर एक-एक लाख और राकांपा और सीपीएम पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
बता दें कि कांग्रेस, भाजपा, एनसीपी और सीपीएम सहित कई दलों ने बिहार चुनाव के दौरान अपनी पार्टी के उम्मीदवारों पर चल रहे आपराधिक मुकदमों के बारे में सार्वजनिक घोषणा नहीं की थी। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने इन पार्टियों के खिलाफ यह कार्रवाई की है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दे रखा है कि पार्टियों को यह घोषणा करना होगा कि उनकी पार्टी के कितने उम्मीदवारों पर आपराधिक मुकदमे चल रहे हैं।
राजनीति में अपराधीकरण खत्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कई अहम टिप्पणी कीं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत ने कई बार कानून बनाने वालों को आग्रह किया कि वे नींद से जगें और राजनीति में अपराधीकरण रोकने के लिए कदम उठाएं। लेकिन, वे लंबी नींद में सोए हुए हैं।
शीर्ष न्‍यायालय ने कहा कि कोर्ट की तमाम अपीलें इन तक नहीं पहुंच पाई हैं। राजनीतिक पार्टियां अपनी नींद से जगने को तैयार नहीं हैं। कोर्ट के हाथ बंधे हैं। यह विधायिका का काम है। हम सिर्फ अपील कर सकते हैं। उम्मीद है कि ये लोग नींद से जगेंगे और राजनीति में अपराधीकरण को रोकने के लिए बड़ी सर्जरी करेंगे।
क्या है सुप्रीमकोर्ट के निर्देश
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों को निर्देश दिया है कि वे अपनी वेबसाइट के होमपेज पर उम्मीदवारों के आपराधिक इतिहास के बारे में जानकारी प्रकाशित करें। इसके मुताबिक, अब हर पार्टी की वेबसाइट के होमपेज पर अब अनिवार्य रूप से एक कॉलम होगा, जिसमें ‘आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार’ लिखा होगा। इतना ही नहीं, शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को एक समर्पित मोबाइल ऐप्लीकेशन (मोबाइल एप) बनाने का भी निर्देश दिया है, जिसमें उम्मीदवारों के आपराधिक इतिहास के बारे में जानकारी शामिल हो। इसका उद्देश्य है कि कोई भी मतदाता एक बार में ही अपने मोबाइल फोन पर अपने उम्मीदवार के बारे में पूरी जानकारी जुटा सके।

हाईकोर्ट की मंजूरी बिना वापस नहीं होगा केस

नई दिल्ली। सुप्रीमकोर्ट ने मंगलवार को निर्देश दिया है कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ कोई आपराधिक मामला संबंधित हाईकोर्ट की मंजूरी के बगैर वापस नहीं लिया जा सकता है। शीर्ष अदालत के इस फैसले का उद्देश्य राजनीति में अपराधीकरण को कम करना है। जस्टिस आरएफ नरीमन और बीआर गवई की पीठ ने इस संबंध में अपने 13 फरवरी, 2020 के फैसले में निर्देश को संशोधित किया है। बता दें कि पीठ बिहार विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों के आपराधिक इतिहास को प्रकाशित करने में विफलता का आरोप लगाते हुए दायर अवमानना याचिकाओं में अपना फैसला सुना रही थी।

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