छह माह तक के बच्चों को केवल स्तनपान, छह माह से दो साल तक मां के दूध के साथ ऊपरी आहार जरूर दें


शामली, 26 अगस्त 2021।बच्चे के जन्म के बाद आरंभ के दो सालों में दिया जाने वाला अच्छा पोषण बच्चे के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। शुरू में विशेष रूप से स्तनपान कराना  तथा दो साल या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखना और छह महीने के बाद उम्र के अनुसार शुरू होने वाले अच्छे और सुरक्षित, पूर्ण आहार देने की शुरूआत करना, बचपन में शारीरिक विकास में बाधा (स्टंटिंग) को दूर करने और बाल कुपोषण के चले आ रहे दौर को खत्म करने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। पहले वर्ष में पूरक स्तनपान और उत्तम पोषण से बच्चों को कुपोषण से बचाया जा सकता है। यह कहना है जिला कार्यक्रम अधिकारी संतोष श्रीवास्तव का।
जिला कार्यक्रम अधिकारी संतोष श्रीवास्तव ने बताया- जुलाई माह से शुरू हुए “संभव अभियान” के तहत शिशु पोषण पर फोकस किया गया। इसके अंतर्गत कुपोषित बच्चों की चिकित्सक से स्वास्थ्य जांच करायी जा रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने क्षेत्र में बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी तथा गर्भवती व धात्री महिलाओं को बताया कि शून्य से छह माह तक के बच्चों को केवल स्तनपान कराएं और छह माह से दो वर्ष तक के बच्चों को स्तनपान के साथ ऊपरी आहार भी दें। उन्होंने बताया कि शिशु पोषण के तहत कम वजन, अतिकुपोषित (सैम)/ मध्यम कुपोषित (मैम) बच्चों पर फोकस किया जा रहा हैं। ऐसे बच्चों के अभिभावकों को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता समझा रही हैं कि बच्चे को चाहे बुखार हो या दस्त, अथवा अन्य कोई समस्या हो, ऊपर का खाना देना बंद नहीं करना है। तबियत ख़राब होने की स्थिति में भी स्तनपान के साथ ऊपरी आहार देना है। स्तनपान छोटे बच्चे की उत्तरजीविता,  स्वास्थ्य,  पोषण, बच्चे में विश्वास एवं सुरक्षा की भावना के विकास को ही नहीं, अपितु मस्तिष्क विकास और सीखने की शक्ति में वृद्धि करता है। छह से नौ माह के बच्चे को माँ के दूध के साथ दलिया, आटे या सूजी का हलवा, सूजी की खीर, मसला हुआ केला, मसला हुआ दाल-चावल, खिचड़ी एक चम्मच घी और तेल अवश्य दें। इसके साथ ही मौसमी फल भी दें। जैसे- जैसे बच्चा बड़ा होता जाए खाने की मात्रा बढ़ाते रहें।  नौ माह की आयु के बाद बच्चे को स्वयं खाना खाने को दें तथा ऊपरी आहार के साथ-साथ बच्चों का सही समय पर नियमित टीकाकरण भी कराएं। यह टीके बच्चों को जानलेवा बीमारियों से बचाते हैं।
अभियान के तहत जनपद में वर्तमान में शून्य से पांच साल तक के बच्चों की संख्या करीब 96610 है। 91875 सामान्य बच्चे हैं जबकि 1579 मध्यम अल्प वजन के बच्चे हैं। 604 गंभीर अल्प वजन वाले बच्चे हैं। 1614 मध्यम कुपोषित (मैम) व 551 अतिकुपोषित (सैम) बच्चों को चिन्हित किया गया। 92 बच्चे दिव्यांग मिले, जिनमें से 59 शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं जबकि 33 मानसिक रूप से दिव्यांग हैं।
ऊपरी आहार का अर्थ
ऊपरी आहार का अर्थ है अन्य आहार व तरल पदार्थ जो पूरक के तौर पर माँ के दूध के अतिरिक्त दिया जाता है, न कि माँ के दूध के स्थान पर।
स्तनपान शिशु का सर्वोत्तम पोषण है इसलिए कम से कम छह महीने तक शिशु को केवल स्तनपान कराना चाहिए।
स्तनपान दो वर्ष तक की आयु या उसके बाद तक भी करवाया जा सकता है।
स्तनपान कराने से बच्चों को सामान्य बीमारियां नहीं होती और इसमें बच्चो के विकास के लिए जरूरी सभी पोषक तत्व होते हैं।
माँ के दूध से शिशु को पोषण के साथ-साथ रोगों से लड़ने की शक्ति मिलती है।

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