तुम्हीं वजह मेरे जीवन की,
तुम ही मेरी सांसे हो,
तुम्हीं सपन हो ख्वाब तुम्हींहो,
तुम  ही  मेरी  आहें  हो,
तुम्हीं  सप्तरंगी ऋजुरोहित,
तुम  ही मेरी अंकन  हो,
सीने में  यह धड़क रहा पर,
तुम ही दिल की धड़कन हो।



तुम्हीं  तान  मेरी  बंशी  की,
पूर्ण समर्पित राधा हो,
अर्ध तुम्हारे बिन यह जीवन,
अंग मेरा तुम आधा हो,
बंशीवट की छाँह तुम्हीं हो,
तुम ही मेरी मधुवन  हो,

तुम में रामायण का दर्शन,
पावन सी तुम गीता हो,
दिव्य स्वरुपा तुम्हीं लक्ष्मी,
सरस्वती हो सीता हो,
आराधन तुम हो 'नरेश' की,
तुम्हीं प्रार्थना वन्दन हो,
सीने में यह धड़क रहा पर,
तुम  ही  दिल की धड़कन हो।


- नरेश चन्द्र उनियाल।
पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड।

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