मेरठ। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच मेरठ के संतोष अस्पताल से रविवार को करीब 10 मरीजों को आक्सीजन की कमी का हवाला देकर अन्यत्र ले जाने को कह दिया गया। अस्पताल से अचानक लिए गए इस निर्णय के बाद कोविड-19 मरीजों के स्वजन में अफरातफरी मच गई। किसी अन्‍य अस्पताल में जगह न मिलने के कारण भटकने को मजबूर होना पड़ रहा है।
मरीजों के स्‍वजन आरोप लगा रहे हैं कि अस्पताल के भीतर मरीजों को समय से न दवा मिल रही न खाना मिल रहा है। यही बात अस्पताल प्रबंधन से रविवार सुबह पूछने पर उन लोगों ने मरीजों को अस्पताल में आक्सीजन कम बता कर अन्य हॉस्पिटल में ले जाने को कह दिया। आरोप है इस अस्पताल में ज्यादातर मरीज बाहर के जिले से हैं, जिनसे बेड दिलाने के नाम पर एक-एक लाख रुपये की वसूली भी की जा रही है। अस्पताल में बेड न होने की बात कही जाती है जबकि कुछ लोग पीछे से एक लाख रुपये देने की एवज में बेड दिलाने का दावा भी कर रहे हैं।
एक को खो चुके, दूसरे में भी दिख रही लापरवाही
जयवर्धन मलिक ने बताया कि उनके बहनोई अस्पताल में भर्ती हैं। इसी अस्पताल से तीन दिन पहले उनके चाचा कीर्तिवर्धन मलिक की कोविड-19 से मौत हो गई। बहनोई से पूछने पर पता चला कि कोविड-19 से पीड़ित लोगों को न दवा मिल रही न ही ठीक से खाना ही मिल रहा। यही बात आज कुछ मरीजों के स्वजन ने मिलकर एक साथ अस्पताल प्रबंधन से पूछा तो सभी नाराजगी दिखाने लगे। जयवर्धन ने कहा कि सवाल करने के बाद ही उन मरीजों को दूसरे अस्पताल में ले जाने को कह दिया गया।

पानी तक न देने का आरोप

एक अन्‍य मरीज के स्‍वजन रवि पाल सिंह ने बताया कि उनके मरीज अजय सोम की भी यही हालत हो गई है। चार दिन से अस्पताल में भर्ती हैं। परसों रात पानी मांगते रहे लेकिन किसी ने उन्हें पानी नहीं दिया। कल शाम भी उन्हें टॉयलेट जाना था लेकिन किसी ने मदद नहीं की और अंत में बिस्तर पर ही टॉयलेट हो गया। आज सुबह जाकर देखा तो पता चला न दवा मिली ना कि खाना मिला। इसकी शिकायत अस्पताल और डीएम को करने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने आक्सीजन की कमी का हवाला देते हुए मरीज को बाहर ले जाने को कह दिया। अस्पताल की ओर से न ही रेफर लेटर दिया गया, न ही कुछ और जानकारी दी गई कि कहां पर बेड खाली है जहां उन्हें ले जाया जा सकता है। अस्पताल में भर्ती कराने के लिए मरीज को साथ लेकर दर-दर भटकना पड़ रहा है। उनके साथी अश्वनी ने बताया कि अस्पताल मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। चार दिन में 84000 रुपये का का बिल बना दिया और मरीज की हालत ज्यों की त्यों बनी हुई है। अब अस्पताल से बाहर जाने को कहते ही पूरी वसूली भी कर रहे हैं। रतन सागर जैन ने बताया कि उनकी बहन रुदल जैन कोविड-19 से संक्रमित होकर अस्पताल में भर्ती हैं। अस्पताल की व्यवस्था खराब होने की शिकायत करने पर उन्हें भी बाहर ले जाने को कह दिया गया है। उनके भाई सतपाल जैन ने बताया कि वह दिल्ली के कृष्णानगर से मेरठ आए हैं। अस्पताल में ऑक्सीजन न मिलने के कारण उन्हें बाहर से ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर लगाना पड़ा।
 

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