दोषियों के खिलाफ कठौर से कठोर कार्रवाई हो-  अतुल कृष्ण


 मेरठ । सुभारती मेडिकल  कालेज के दो स्टॉफ केा मरीजों को लगने वाले रेमडिसिवर इंजेक्शन की कालाबाजाी करने के मामले में पकडे गये दो स्टॉफ के पकडे जाने के बाद सुभारती ट्रस्ट के संस्थापक डाअतुल कृष्ण ने कार्रवाई की प्रशंसा की है। उन्होने पकडे गये दो स्टॉफ को कडी से कडी सजा दिलाने के लिये कहा है। जिसमें मृत्यु दंड व आजाीवन कारावास हो तो भीउचित  होगा। उन्होने गंभीर आपदा के समय अवैध रूप से लार्भाजन लगे लोगों के खिलाफ की मांग की है। 
ट्रस्टी की ओर से जारी पत्र में पुलिस कार्रवाई  का जवाब देते हुए अपनी सफाई दी है। आरोप है कि सुभारती मेडिकल कॉलिज के संलग्न चिकित्सालय में दो नर्सिंग स्टाफ आबिद एवं अंकित द्वारा पुलिस को एक रेमडेसिवर का इंजेक्शन रूपये 25,000 में बेचा गया एवं आश्वासन दिया गया कि अगले दिन वे तीन इंजेक्शन और इसी दाम पर उपलब्ध करा देंगे। यह एक अत्यन्त गम्भीर आरोप है एवं दोषियों को कठोर से कठोर दण्ड दिया जाना चाहिए। जिसमें यदि मृत्यु दण्ड अथवा आजीवन कारावास भी हो तो उचित है।
2 दूसरी बात यह है कि यह कि रेमडेसिवर का इंजेक्शन कहाँ से आया। आरोप है कि यह इंजेक्शन एक रोगी को लगना था जिनकी मृत्यु 22 अप्रैल 2021 को हो गयी परन्तु उसे रोगी को न लगाकर बेचा गया। इस सम्बन्ध में सुभारती प्रबन्धन की आरम्भिक जाँच में यह स्पष्ट हुआ है कि रोगी को केवल तीन इंजेक्शन लगने थे जो उसको लगाए गए। आरोपी ने स्टॉक से किसी प्रकार चार इंजेक्शन निकलवा लिए। चौथा इंजेक्शन जिसको रोगी को नहीं लगना था उसे आरोपी द्वारा अपने पास रख लिया गया एवं उसे अवैध रूप से बेचने का प्रयास किया गया। यह आरोप बेबुनियाद है कि रोगी को इंजेक्शन के बदले पानी लगा दिया गया अथवा इंजेक्शन न लगने से रोगी की मृत्यु हो गई हो।
3- अगला एक महत्वपूर्ण प्रश्न है कि क्या यह एक एकल मामला था या यह एक रोजर्मरा का मामला है। पुलिस की विज्ञप्ति में यह कहा गया है कि कुछ कर्मचारी इंजेक्शन मरीजों को न लगाकर धन कमाने के लालच में ज्यादा पैसे देने वाले मरीजों व उनके सम्बन्धियों को बेच देते हैं। यदि यह एक सामान्य व्यक्तव्य है तो हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं हैं, परन्तु यदि यह सुभारती चिकित्सालय के सन्दर्भ में लिखा गया है तो यह बेबुनियाद है एवं बिना जाँच के एवं ठोस प्रमाण के दिया गया गैर जिम्मेदाराना वक्त्वय है। सुभारती प्रबन्धन द्वारा की गई आरम्भिक जांच में यह ज्ञात हुआ है कि यह केवल एकल मामला था एवं इस प्रकार की कोई घटना कभी नहीं घटित हुई है और न ही ऐसी कोई शिकायत किसी के भी द्वारा की गई है।

4 एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या सुभारती में कार्यरत् गार्ड एवं बाउन्सर द्वारा पुलिस के कार्य में बाधा डालने की कोशिश की गयी और उनके साथ हाथापाई की गयी। इसके सन्दर्भ में यह उल्लेखनीय है कि पुलिसकर्मी जो आरोपी को पकडऩे आए थे वे सादे.लिबास में थे, न कि पुलिस की वर्दी में। ऐसे में यह सुरक्षाकर्मियों का दायित्व हो जाता है कि वे अपने स्टॉफ की सुरक्षा करें। वास्तव में पुलिसकर्मियों को संस्था के किसी वरिष्ठ अधिकारी को विश्वास में लेकर सम्पूर्ण कार्यवाही करनी चाहिए थी।
 सम्पूर्ण प्रकरण की सत्यता निम्नवत् है
सुभारती प्रबन्धन द्वारा आरम्भिक जांच से यह ज्ञात हुआ है कि  23 अप्रैल  की रात्रि समय लगभग 10.20 बजे सादे लिबास में कुछ लोग छत्रपति शिवाजी सुभारती अस्पताल के आपातकालीन गेट से भागते हुए अन्दर घुसे, जिनके हाथ में पिस्टल भी थी। ये लोग सुभारती अस्पताल के आपातकालीन द्वार से होते हुए एसआईसीयू में घुस गए। एसआईसीयू के अन्दर एक कमरे में नर्सिंग स्टाफ  आबिद खान को उन्हांने पकड़ लिया। बाहर लाते समय सुरक्षा सुपरवाईजर व अन्य सुरक्षाकर्मियों ने उन व्यक्तियों से पूछा कि आप कौन हैं, और इस प्रकार अचानक एक स्वास्थ्यकर्मी को पकड़ कर कहां ले जा रहे हैं। उन्होंने कुछ भी बताने से मना कर दिया, और स्वास्थ्यकर्मी  आबिद खान को लेकर एक सफेद रंग मारूति स्विफ्ट गाड़ी  में चलने लगे। उसके बाद दोबारा पूछने पर उनमें से एक ने बताया कि मेरा नाम एसआई मोहसिन खान हैं, और मैं थाना देहली गेट मेरठ से आया हूँ। उन्होंने यह भी बताया कि हमको सूचना मिली थी कि यह स्वास्थ्यकर्मी सुभारती अस्पताल के बाहर वेदव्यासपुरी में जाकर कोई दवाईं चोरी छिपे बिक्री करता है। इस सूचना के आधार पर इस स्वास्थ्यकर्मी को पुछताछ के लिए अपने साथ लेकर जा रहे हैं। सुरक्षा सुपरवाईजर ने तुरन्त ही सुभारती पुलिस चौकी, थाना जानी के चौकी इंचार्ज से इसकी जानकारी की तो उन्होंने इस बात की पुष्टि की। यह जानकार सुरक्षा कर्मियों ने उनका कोई प्रतिरोध नहीं किया।
इनके जाने के थोड़ी देर बाद ही पुलिस चौकी इंचार्ज सुभारतीपुरम  विनीत कुमार व एसओ जानी व क्षेत्राधिकारी सीओ सरधना व अन्य पुलिसकर्मियों को साथ लेकर आये एवं 6 सुरक्षाकर्मियों जो कि अस्पताल में ड्यूटी पर थे को थाना जानी ले गए।
अत: सुरक्षाकर्मियों ने जो कुछ भी किया वह अपने कार्यपालन के रूप में किया। उनको दोषी बनाना या उन पर आरोप लगाना अनुचित हैं। वर्तमान में सुभारती अस्पताल में 200 से अधिक कोविड रोगी भर्ती है जिनमें से अनेकों गम्भीर रूप से बीमार है। ऐसे समय में किसी भी चिकित्सालय के संचालन में सभी वर्ग के कर्मचारियों की नितान्त आवश्यकता होती हैं। ऐसे कर्मचारियों को गिरफ्तार करना जिन्होंने अपना कर्तव्य पालन किया हो एवं किसी प्रकार का अनुचित कार्य न किया हो सम्पूर्ण स्वास्थ्य कर्मियों के मनोबल को तोडऩे के समान है। सुभारती प्रबन्धन सभी सुरक्षा कर्मियों द्वारा अपने क्र्तव्य पालन करने की सराहना करता है एवं उनके लिए पूरी पैरवी करेगा तथा उन्हें पूरा हर्जाना देगा।
एक समाचार पत्र द्वारा यह प्रकाशित किया गया है तथा कुछ सोशल मीडिया पर भी यह प्रसारित किया जा रहा है कि पुलिस द्वारा सुभारती के ट्रस्टी डा0 अतुल कृष्ण एवं डा कृष्णा मूर्ति के विरूद्ध भी प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस विषय में मैं तभी कोई टिप्पणी करूंगा जब मुझे इस बात की अधिकारिक पुष्टि हो जाए कि यह सत्य है। वर्तमान में मैं मात्र इतना कहना चाहुंगा कि सुभारती प्रबन्धन अपने स्तर से इस विषय की गम्भीरता से जांच कर रहा है एवं प्रशासन को पूरा सहयोग देगा ताकि सम्पूर्ण प्रकरण की गहराई तक पहुंचा जा सके एवं सभी दोषियों को पकड़ा जा सके।
 


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