मेरठ। जिले में 28 निजी अस्पतालों को कोविड वार्ड जरूर बना दिया गया, लेकिन संसाधन नाकाफी हैं। ऑक्सीजन आपूर्ति तक के ठीक इंतजाम नहीं हैं। इससे कोरोना मरीजों को हर रोज ऑक्सीजन की दिक्कत आ रही है।
एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज, सुभारती व मेडिकल कॉलेज खरखौदा पर अपने ऑक्सीजन प्लांट हैं। सात हॉस्पिटलों में ऑक्सीजन सेंट्रल लाइन बिछी हुई है। जबकि 20 में ऑक्सीजन सिलेंडर से ही मरीजों को इसकी सप्लाई दी जाती है। दो निजी हॉस्पिटलों में ऑक्सीजन प्लांट हैं, लेकिन वे चालू हालत में नहीं हैं।
मेरठ में इस वक्त ऑक्सीजन को लेकर जबरदस्त मारामारी है। यूं तो ऑक्सीजन सिलेंडर वितरण करने वाले 9 डीलर हैं, लेकिन आपूर्ति कम होने से दो फैक्ट्री ही काम कर पा रही है। तरल ऑक्सीजन इन दोनों फैक्ट्रियों के पास आती है। यहां उसे छोटे-छोटे सिलेंडरों में बदलकर हॉस्पिटलों तक पहुंचाया जाता है। इस प्रक्रिया में काफी वक्त लगता है। यदि सभी अस्पताल अपने ऑक्सीजन प्लांट बना लें तो ऑक्सीजन आपूर्ति में इतनी दिक्कत नहीं आएगी।
मरीजों से कहा, ऑक्सीजन बैकअप रखें

निजी अस्पताल अब मरीजों से ही अपना ऑक्सीजन बैकअप रखने के लिए बोल रहे हैं। यहां तक कि कुछ मरीजों को इसी शर्त पर भर्ती किया जा रहा है कि वे अपना ऑक्सीजन सिलेंडर खुद लेकर आएंगे। अस्पताल के पास सिलेंडर की व्यवस्था नहीं है।
दूसरे प्रदेशों की ऑक्सीजन से मिल रही सांस
छत्तीसगढ़ के भिलाई से 20 टन तरल ऑक्सीजन का टैंकर आज रात या कल सुबह तक मेरठ पहुंचने की उम्मीद है। रुड़की से भी दस टन गैस रोजाना मंगाई जा रही है। इसके अलावा महाराजगंज जिले की साइड में एक प्लांट से भी ऑक्सीजन देने के लिए मेरठ के स्वास्थ्य विभाग ने संपर्क किया है। अभी मेरठ में 50 टन की डिमांड है, जिसके सापेक्ष 25 टन ऑक्सीजन मिल पा रही है।

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