गर्भपात जितना ज्यादा कराया जाए उतना ही सरल व सुरक्षित होता है 

 

मेरठ। अनचाहा गर्भ और गर्भपात महिला के प्रजनन आयु के दौरान होने वाली सामान्य प्रक्रियाएं हैं । पर अक्सर हम लोग इस विषय पर बात करने से हिचकिचाते हैं और फल स्वरूप सही जानकारी महिलाओं तक नहीं पहुँच पाती । महिलाओं के पास अनचाहा गर्भ ठहरने पर क्या विकल्प उपलब्ध हैं और हमारा कानून इसके बारे में क्या कहता है । यह जानकारी सबके पास ना होने के कारण कई महिलायें गर्भपात के लिए असुरक्षित विकल्पों का चयन करती हैं । जो कि बहुत घातक है। उक्त जानकारी ग्रामीण समाज विकास केन्द्र के सचिव मेहर चंद ने दी है । 
 उन्होने बताया कि भारत में प्रतिदिन 13 महिलाओं की असुरक्षित गर्भपात से संबंधित कारणों से मृत्यु हो जाती है और सैकड़ों महिलाएं गंभीर जटिलताओं का सामना करती हैं। यानि देश में होने वाली मातृ मृत्यु में से लगभग 8  प्रतिशत मृत्यु असुरक्षित गर्भपात के कारण होती हैं।  
यदि किसी महिला को माहवारी के दिन चढ़ गये हों या उसे अनचाहे गर्भ के ठहरने की आशंका हो तो उसे बिना किसी देरी के नजदीकी आशा या एएनएम से संपर्क करना चाहिए या डॉक्टर को दिखाना चाहिए । अगर गर्भधारण की पुष्टि हो जाती है और महिला गर्भ नहीं रखना चाहती है, तो उसे गर्भपात का निर्णय जल्दी ले लेना चाहिए । यदि लिंग जांच महिला के निर्णय का आधार ना हो और यदि गर्भ 20 सप्ताह यानी लगभग 4-5 महीने तक का हो, तो एमपीटी एक्ट 1971 के तहत गर्भपात कराया जा सकता है। अगर गर्भ 9 सप्ताह तक का हो तो गोलियों द्वारा गर्भपात भी किया जा सकता है। गर्भपात जितना जल्दी कराया जाये उतना ही सरल और सुरक्षित होता है । 
कई बार ऐसा हो सकता है कि गर्भपात सेवाएँ लेने के लिए पहुँचने तक गर्भ 12 हफ्ते से ऊपर का हो । इसके पीछे बहुत से कारण हो सकते हैं, जैसे की गर्भ की जानकारी बाद में लगना, होने वाले शिशु में जन्मजात विक्रती होना, अस्पताल समय से ना पहुँच पाना, कोरोना की वजह से समय पर निर्णय ना ले पाना, इत्यादि। यदि महिला 12 हफ्ते या 3 महीने से ज्यादा अवधि के गर्भ का गर्भपात करवाना चाहती है, तो उसमें उसे घबराने की आवश्यकता नहीं है । 20 सप्ताह तक गर्भपात सेवाएँ लेने के लिए महिला को बड़े अस्पताल जैसे कि जिला अस्पताल, 24Ó7 उपलब्ध सीएचसी या मेडिकल कॉलेज अस्पताल जाना होगा । गर्भावस्था की अवधि के आधार पर महिला को इन सेवाओं के लिए अस्पताल में भर्ती किया जाता है। महिलाओं को ध्यान रखना चाहिए कि वह गर्भपात के साथ तुरंत ही किसी गर्भनिरोधक साधन का उपयोग शुरू कर दें, क्येंाकि  गर्भपात और अगले गर्भ धारण के बीच में कम से कम 6 महीने का अंतर रखना उचित होता है । 
एक महिला के लिए गर्भपात एक मुश्किल निर्णय हो सकता है और वह प्रक्रिया के दोरान कई तरह की भावनाओं का अनुभव करती है । उसके पति एवं परिवार को महिला के निर्णय में सहयोग देना चाहिए और उसकी सुरक्षित और कानूनन सेवाएं लेने में मदद करनी चाहिए । सही जानकारी और आपसी सहयोग से हम देश में हो रही असुरक्षित गर्भपात संबंधित जटिलताओं की संख्या कम कर सकते हैं ।
 

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