मेरठ। अवैध कटान पर नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव, कमिश्नर, डीएम व नगरायुक्त समेत कई अफसरों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर काउंटर एफिडेविट दायर करने को कहा है। इस मामले में हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 26 अप्रैल को होनी है। इस मामले को लेकर दायर की गयी याचिका की 16 मार्च को  सुनवाई करते हुए उक्त सभी अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं। आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराने की पीआईएल पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने नगरायुक्त से पूछा है कि साल 2014 में जब हापुड़ रोड स्थित सरकारी पशुशाला बंद करा दी गयी तो फिर शहर की जरूरत के लिए 80 टन बताए जा रहे मीट की सप्लाई कहां से हो रही है। इसके अलावा कोर्ट ने 3 सौ करोड़ की घोसीपुर पशु वधशाला के हश्र को लेकर भी सवाल पूछे हैं। याचिका में कहा गया है कि मेरठ में कुछ इलाके ऐसे हैं जहां गली-गली में पुलिस व नगर निगम प्रशासन की मिलीभगत से अवैध कटान किया जा रहा है। अवैध कटान करने वाले प्रतिबंधित गौवंश का भी कटान कर रहे हैं। अफसरों की लापरवाही की वजह से केवल अवैध कटान ही नहीं हो रहा है बल्कि अवैध कटान के कारण मेरठ प्रदूषित भी हो रहा है। वध के बाद पशुओं का खून व अन्य गंदगी नाले नालियों में बहायी जा रही है। इससे पूरे इलाके में दुर्गंध उठी रहती है। सांस लेना दुश्वार हो गया है।
बोरिंग कर जमीन में उतार रहे खून
याचिका कर्ता लोकेश खुराना ने बताया कि जिन पशुओं का कटान किया जाता है, कटान करने वाले उन पशुओं का खून जमीन में सैकड़ों फुट गहरा बोरिंग कर उसमें उतार देते हैं। इससे भूमिगत जल प्रदूषित हो रहा है। हापुड़ रोड सहित पुराने शहर के कई इलाकों में पानी इसी कारण से बेहद प्रदूषित हो गया है। यह पानी अब पीने लायक नहीं रहा है। जिन इलाकों इस पानी का प्रयोग किया जाता है, वहां बीमारियां फैल रही हैं।
कोर्ट के चाबुक के साइड इफैक्ट
पिछले चार दिनों के दौरान जनपद के अलग अलग हिस्सों में अवैध कटान करने वालों का आफ एन्काउंटर और अवैध कटान के ठिकानों पर ताबड़तोड़ पुलिस दबिशों को हाईकोर्ट के चाबुक का साइड इफैक्ट माना जा रहा है। दरअसल 26 अप्रैल को हाईकोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई से पहले मेरठ के अधिकारियों को एफिडेविट दाखिल करना है, जिसमें अवैध कटान के लिए किए जा रहे प्रयासों और उनके नतीजों की जानकारी देनी होगी।


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