इंडियन ऑयल डिपो से आर्मी की यूनिट्स में जाने वाले टैंकरों को भी नहीं बख्शा चोरों ने

-इक्कवारी  को लेकर रिपोर्ट पीडी मध्यम कमान और वहां से मंत्रालय को जाएगी भेजी
 

मेरठ। इंडियन ऑयल से निकलने वाले ऑयल कैंटरों से चोरी का मामला केवल पंपों तक तेल की ठुलाई कराने वाले कैंटरों तक ही सीमित नहीं रहा है। तेल माफियाओं ने सेना के ट्रकों तक को नहीं बख्शा। कड़ी सुरक्षा में सेंध लगाते हुए सेना के ट्रकों से भी तेल चोरी की वारदात अंजाम दे डाली गयी। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि ऑयल चोरी करने वालों का नेटवर्क कितना स्ट्रांग है। कहां तक उनकी पहुंच है। लेकिन सेना के ऑयल टैंकरों को छेड़कर जरूर गलती कर दी। हालांकि अभी यह साफ नहीं कि टैंकरों से ऑयल चोरी करने वाले गिरोह तक हाथ पहुंचेंगे या नहीं, लेकिन इतना आर्मी इंटेलीजैंस के रडार पर पुलिस और आपूर्ति विभाग के कई नामों की चर्चा सुनने में आयी है।
आर्मी सप्लाई कोर के आधीन
सेना के वाहनों को तेल मुहैय्या कराए जाने का काम आर्मी सप्लाई कोर करती है। सेना की इसी कोर की देखरेख में यूनिटों के हल्के भारी वाहनों को तेल मुहैय्या कराया जाता है। सेना की यूनिट तक यह तेल भारी भरकम कैंटरों की मार्फत इंडियन ऑयल के डिपो से पहुंचता है। सेना के यूनिट में सरकारी व निजी पंपों की तर्ज पर जमीन में दबाए गए भारी भरकम ऑयल कैंटरों तक यह तेल रखा जाता है, जहां से जरूरत के अनुसार इसको सेना के वाहनों को मुहैय्या कराया जाता है।
पूठा कांड के बाद खुलासा
चर्चा है कि पिछले दिनों टीपीनगर के पूठा में पंपों के आयल टैकरों से चोरी मामले के खुलासे के बाद ही सेना के ऑयल टैंकरों से तेल चोरी की बात संज्ञान में आयी। हालांकि इस मुददे पर सेना की ओर से कोई अधिकृत जानकारी मीडियो को रिलीज नहीं की गयी है। आमतौर पर सेना इस प्रकार के किसी भी मामले को मीडिया या फिर सार्वजनिक रूप से शेयर नहीं करती है, लेकिन चर्चाओं की मानें तो पूठा कांड में ऑयल टैंकरों से चोरी की वारदात सामने आने के बाद ही आर्मी इंटेलीजेंस एकाएक सतर्क हो गयी और इंडियन ऑयल से आर्मी यूनिट्स तक आने वाले सेना के वाहनों पर नजर रखनी शुरू कर दी।
टॉप सीक्रेट रिपोर्ट गले की फांस
आर्मी इंटेलीजैंस की तेल चोरी पर जिस सीक्रेट रिपोर्ट की बात सुनने में आ रही है। वह पुलिस व आपूर्ति विभाग के अफसरों के गले की फांस बन सकती है। बताया जाता है कि इस रिपोर्ट में वो तमाम नाम शामिल हैं जिनको तेल चोरी के खेल में लिप्त या फिर उनकी भूमिका संदिग्ध पायी गयी है। केवल नाम ही नहीं जिनको संदिग्ध पाया गया है उनके वाहनों के नंबर तथा डिपो व पूठा व कुंडा सरीखे ऑयल चोरी व मिलावट के ठिकानों पर अमुक वाहन कब और कितनी बार वहां पर आया, इस सब को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर आर्मी इंटेलीजेंस की ओर से प्रिसिपल डायरेक्टर सेन्ट्रल कमान को भेजे जाने की बात सुनने में आयी है। नाम न छापे जाने की शर्त पर आपूर्ति विभाग के एक कर्मचारी ने बताया कि उनके अफसर तो खुद तेल चोरी को पकड़ने के लिए वेष बदल कर कई रात सुभारति चौकी के बगल मे खुले आसमान के नीचे डेरा डाले रहे थे।
अनभिज्ञ नहीं आपूर्ति अफसर
तेल चोरी के मामलों की आर्मी इंटेलीजेंस की इंक्टवारी की बात से आपूर्ति विभाग के टॉप लेबल के अफसर भी अनभिज्ञ नहीं है। बल्कि आर्मी इंटेलीजैंस की कार्रवाई की भनक के बाद आपूुर्ति के बडेÞ अफसरों ने अपने उन स्टॉफ के पेंच कसने शुरू कर दिए हैं जिनको अक्सर ऐसे मामलों को लेकर विभागीय चर्चाओं में रहते हैं। साथ ही बाज आने की भी नसीहत दी गयी है।
तो क्या पुलिस भी चपेट में
यह सवाल इसलिए पूछा जा रहा है कि क्योंकि पुलिस लाइन में विभाग के वाहनों के लिए ऑयल रिलीज करने के लिए पंप बना हुआ है। तेल चोरी के खेल के माफियाओं के हाथ यदि सेना के वाहनों तक पहुंच सकते हैं तो फिर पुलिस के वाहनों तक उनके हाथ पहुंच जाना हैरानी करने जैसा कतई नहीं। पुलिस महकमे के तमाम वाहनों के लिए पुलिस लाइन में लगाए गए पंप से तेल वितरण होता है। पुलिस लाइन के पंप तक इंडियन ऑयल के डिपो से तेल पहुंचाने का काम ऑयल टैकरों से कराया जाता है।

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