फांसी पर लटकाए गये निर्भया के गुहागानर
शुक्रवार तडके ३.३० तक सुप्रीम कोर्ट में चली सुनवाई
मेरठ के पवन जल्लाद ने फंसी पर लटकाया न्यूज प्रहरी 24, दिल्ली : निर्भया के दोषियों ने फांसी से बचने केलिये कानूनी दांवपेंच अपनाया ,लेकिन उन्हें शुक्रवार सुबह ५.३० बजे फांसी पर लटका दिया गया। मेरठ के पवन जल्लाद ने निर्भया के गुहनाहागारों को फांसी पर झुलाया। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की फांसी टालने की याचिका तडके ३.४० मिनट तडके खारिज कर दी। चारो दोषियों के अधिवक्ता फांसी टालने के लिये दांव पेंच खेलते रहे।
दोषियों की याचिका पर देर रात २.३० बजे सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने तडके ३:४० मिनट पर याचिका को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की याचिका पर कहा कि आप बार-बार वही दलील दे रहे हैँ जो हर स्टेज पर, हर कोर्ट में खारिज हो चुकी है। राष्ट्रीयपति के पास भी दया याचिका खारिज हो चुकी है। दोषियों के अधिवक्ता ने पवन की उम्र का सवाल भी उठाया। यह भी कहा कि उनकी एक दया याचिका एलजी के पास भी लंबित है, इससे पहले निर्भया के दोषियों के लिये जारीह हुए चौथे डेथ वांरट पर रोक लगाने से दिल्ली की पटियाला हाऊस अदालत ने गुरूवार को इंकार कर दिया । इसके साथ-साथ दोषियों के वकील ने तमाम कानूनी दांव पेेंच आजमाते हुए सुप्रीम कोर्ट में तीन याचिकाए दायर की। लेकिन हर जगह याचिका खारिज हो गयी। इसके बाद चार में तीन दोषियों ने रात ८.३० बजे दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। वहां कोर्ट ने बेवजह की बहस के लिये वकील को लताड लगायी। कोर्ट ने कहा कि तथ्यों पर बहस के बजाय बेवजह की दलीलें देकर समय खराब न करें। इसके बाद हाईकोर्ट ने भी याचिका को खारिज कर दिया।ये था मामला
इस वारदात में ६ लोग शामिला थे। राम सिंह ने २०१३ में जेल में ही फंासी लगा ली थी, जबकि एक नाबालिग था जो सुधार ग्रह में रहने के बाद तीन साल बाहर आ चुका है। चारों दोषियों अक्षय सिंह, मुकेश सिंह, पवन गुप्ता और विनय शर्मा ने अंतिम पलों तक फंासी टलवाने के लिये तमाम प्रयास किये। पिडिता के परिवार कोू सात साल इंतजार करना पडा। निर्भया की मॉ ने कहा , मेरी बेटी की आत्मा को अब शांति मिलेगी। सात साल की कानूनी लडाई के बाद उसे न्याय दिला पायी हू।चौथे डेथ वारंट को रोकने के लिये कोरोना का बनाया ढाल
आरोपियों के अधिवक्ता एपी सिंह ने चौथे डेथ वारंट पर भी रोक लगवाने के लिये गुरूवार को भरसक कोशिश की। एपी सिंह ने कहा कि मामला अंतराष्ट्रीय न्यायालय में है। इसके अलावा अक्षय की पत्नि की तलाक की अर्जी भी विचाराधीन है। पवन के साथ जेल में मारपीट का मामला भी विचाराधीन है। ऐसे में फांसी नहीं दे सकते । कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के चलते अदालतों का कामकाज प्रभावित है ,इसलिये अंतराष्ट्रीय न्यायालय में मामले की सुनवाई नहीं हो पा रही है। फिलहाल माहौल ठीक नहीं है, इसलिये फांसी रोकी जानी चाहिए।तमिलनाडु पुलिस की स्पेशल फोर्स के जिम्मे थी सेल की सुरक्षा व्यवस्था तिहाड जेल के अंदर की पूरी सुरक्षा व्यवस्था तमिलनाडु पुलिस की स्पेशल फोर्स के जिम्मे सौपीं गयी थी। खासकर तमिलनाडु पुलिस को लगाने का मकसद वह था कि अगर कुछ अंदर ले जाने के लिये सुरक्षाकर्मियों से सांठगाठ की कोशिश हो तो उनके बीच में भाषाई समस्या आ जाए ।


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