‘राहुल गांधी की जमात रिजीम चेंज नहीं करा सकती’, रघुबर दास का कांग्रेस पर हमला

बोले—भारत में सत्ता परिवर्तन का रास्ता बैलेट से होकर गुजरता है, हिंसा या अराजकता से नहीं; एक नवंबर की दिल्ली रैली से पहले सियासी बयानबाजी तेज

नई दिल्ली/रांची। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और ओडिशा के पूर्व राज्यपाल रघुबर दास ने राहुल गांधी और उनके साथ खड़े विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी जमात देश में ‘रिजीम चेंज’ नहीं करा सकती। उन्होंने कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन जनता के मतपत्र से होता है, बंदूक या अराजकता से नहीं।

‘सपना कभी पूरा नहीं होगा’

रघुबर दास ने राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ आंदोलन पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके साथ खड़े वामपंथी दल देश में सत्ता परिवर्तन का सपना देख रहे हैं, जो कभी पूरा नहीं होगा। दास ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण देना और संवैधानिक संस्थाओं के माध्यम से समाधान तलाशना भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि केवल नारों और आरोपों के जरिए जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता।

विदेशी शक्तियों की साजिश का भी लगाया आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री ने आंदोलन के एजेंडे और फंडिंग को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया पर अचानक बड़ी संख्या में फॉलोअर्स जुड़ने का जिक्र करते हुए इसके पीछे विदेशी शक्तियों की साजिश होने का आरोप लगाया। हालांकि, इस आरोप के समर्थन में उन्होंने अपने बयान में कोई विशिष्ट प्रमाण नहीं बताया।

दास ने कहा कि भारत में सत्ता का फैसला जनता करती है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासनकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सरकार का अंत भी चुनाव के जरिए हुआ था।

नक्सलवाद और हिंसा पर भी बोले

रघुबर दास ने नक्सलवाद और उग्रवादी हिंसा को देश की शांति और विकास के लिए चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने वाली हिंसक प्रवृत्तियों का विरोध जरूरी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होनी चाहिए और किसी भी पात्र मतदाता को उसके मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

मोदी सरकार और एसआईआर का किया जिक्र

दास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने विभिन्न चुनौतियों का सामना किया है। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का समर्थन करते हुए इसे देश की संप्रभुता से जोड़ा। साथ ही ‘वोट चोर’ के नारे की तुलना कांग्रेस के पुराने राजनीतिक नारों से की।

गौरतलब है कि राहुल गांधी ने एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में मार्च का ऐलान किया है। कांग्रेस की इस रैली में विपक्षी गठबंधन के नेताओं के शामिल होने की भी बात कही गई है। रैली से पहले भाजपा नेताओं के बयान से राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है।

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