वेंक्टेश्वरा में डांडिया-गरबा की धूम, पारंपरिक वेशभूषा में झूमे छात्र-छात्राएं

संस्थापक सुधीर गिरि बोले- नवरात्रि उत्सव मातृशक्ति के सम्मान और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक

मेरठ। श्री वेंक्टेश्वरा विश्वविद्यालय एवं संस्थान में शारदीय नवरात्रि के अवसर पर डांडिया एवं गरबा उत्सव-2026 की धूम रही। संस्थान के छात्र-छात्राओं और स्टाफ ने पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-तबले और लोक वाद्ययंत्रों की थाप पर जमकर नृत्य किया। धार्मिक और फिल्मी गीतों पर हुई प्रस्तुतियों ने समारोह को यादगार बना दिया।

संस्थान के दुर्गा पंडाल में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ प्रतिकुलाधिपति डॉ. राजीव त्यागी, कुलपति प्रो. कृष्ण कांत दवे, डॉ. मधु चतुर्वेदी, कुलसचिव प्रो. पीयूष कुमार पांडेय और पं. अश्विनी द्विवेदी ने मां दुर्गा एवं मां सरस्वती की प्रतिमाओं के समक्ष आरती और दीप प्रज्ज्वलन कर किया। कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना ‘घर में पधारे गजानन जी’ से हुई। इसके बाद प्रतिभागियों ने ‘ढोली तारो ढोल बाजे’, ‘ढोलीडा-ढोलीडा’, ‘चोगाड़ा तारा’ और ‘राम चाहे लीला चाहे’ जैसे गीतों पर डांडिया और गरबा किया।



मातृशक्ति के सम्मान का प्रतीक है उत्सव

वेंक्टेश्वरा समूह के संस्थापक अध्यक्ष सुधीर गिरि ने नवरात्रि और विजयदशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि डांडिया और गरबा केवल नृत्य या सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि धार्मिक विरासत, महिला सशक्तीकरण और बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में मातृशक्ति सदियों से सम्मानित और पूजनीय रही है।

प्रतिकुलाधिपति डॉ. राजीव त्यागी ने कहा कि डांडिया उत्सव बुराई पर अच्छाई की जीत के साथ मातृशक्ति के सम्मान का संदेश देता है। मातृशक्ति के बिना सृष्टि की कल्पना संभव नहीं है। कुलपति प्रो. कृष्ण कांत दवे और डॉ. मधु चतुर्वेदी ने भी विचार रखे।

इस अवसर पर डीन एकेडमिक डॉ. राजेश सिंह, डॉ. नीतू पंवार, डॉ. सुमन कुमारी, डॉ. ज्योति सिंह, डॉ. मोहित शर्मा, डॉ. योगेश्वर शर्मा, डॉ. अश्विन सक्सेना, डॉ. ओमप्रकाश, डॉ. राजवर्द्धन, डॉ. रीना जोशी, डॉ. एसके श्रीवास्तव, डॉ. आशुतोष, रिंकी शर्मा, डॉ. अंजलि भारद्वाज, डॉ. शिल्पा रैना, डॉ. स्नेहलता गोस्वामी, प्रीतपाल, मेरठ परिसर के निदेशक डॉ. पंकज सिंह और मीडिया प्रभारी विश्वास राणा सहित शिक्षक एवं कर्मचारी मौजूद रहे।



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