हर दौर में सर सैयद को याद किया जाता रहेगा : प्रो. शहपर रसूल

सीसीएसयू में ऑनलाइन कार्यक्रम, वक्ताओं ने शैक्षिक मिशन और साहित्यिक योगदान को आगे बढ़ाने पर दिया जोर

मेरठ, 15 अक्टूबर। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग और आयुसा के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को ‘सर सैयद : शैक्षिक दृष्टि और साहित्यिक चेतना’ विषय पर ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि जामिया मिल्लिया इस्लामिया के उर्दू विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. शहपर रसूल ने कहा कि सर सैयद को हर दौर में याद किया जाता रहेगा, क्योंकि उनके ज्ञान, विचार, दृष्टिकोण और नैतिक चिंतन की प्रासंगिकता हमेशा बनी रहेगी। शिक्षा के बिना कोई भी कौम प्रगति नहीं कर सकती। हमें सर सैयद के संदेश को घर-घर तक पहुंचाना चाहिए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध शोधकर्ता एवं आलोचक प्रो. सग़ीर अफ़राहीम ने की। उन्होंने कहा कि सर सैयद कर्मशील विद्वान थे, जो समय और कौम की नब्ज पहचानते थे। उनके सुझाव उपयोगी सिद्ध हुए। वर्तमान समय में उन्हें समझने के लिए उनके सुधारवादी दृष्टिकोण और शैक्षिक मिशन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

सर सैयद को फिर से पढ़ने की जरूरत

विशिष्ट अतिथि शिब्ली नेशनल पीजी कॉलेज, आजमगढ़ के उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो. मुहम्मद ताहिर ने कहा कि सर सैयद के व्यक्तित्व के अनेक पहलू हैं। हमें उन्हें फिर से पढ़कर उनके विचारों को समझना होगा और उनके मिशन को आगे बढ़ाना होगा। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के डॉ. अब्दुल हफीज ने कहा कि सर सैयद ने समाज को केवल अतीत की महानता याद नहीं दिलाई, बल्कि भविष्य की राह भी दिखाई। प्रसिद्ध पत्रकार आतिफ हनीफ ने अलीगढ़ आंदोलन के शिक्षा प्रसार, सामाजिक कार्य और धार्मिक जागरूकता संबंधी योगदान पर प्रकाश डाला। प्रो. असलम जमशेदपुरी ने शैक्षिक मिशन को आगे बढ़ाने के लिए नए शिक्षण संस्थान स्थापित करने तथा अन्य भाषाओं में सर सैयद पर हुए शोध का अध्ययन करने की आवश्यकता बताई।

डॉ. तकी आबिदी ने सर सैयद के विचारों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि क्या हम वास्तव में उनके बताए मार्ग पर चल रहे हैं। कार्यक्रम में उर्दू विभाग की शोधार्थी सैयदा मरियम इलाही और शाकिर मतलूब ने सर सैयद की साहित्यिक सेवाओं तथा सामाजिक जागरूकता में पत्रिका ‘तहज़ीबुल अख़लाक़’ के योगदान पर शोधपत्र प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शादाब अलीम ने किया। इसमें प्रो. रेशमा परवीन, डॉ. आसिफ अली, डॉ. अलका वशिष्ठ, डॉ. इरशाद सियानवी, मुहम्मद शमशाद, फरहत अख्तर और सईद अहमद सहारनपुरी सहित अनेक शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी ऑनलाइन जुड़े।

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