शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार और मानवीय मूल्य भी जरूरी : प्रो. अतवीर सिंह

सीसीएसयू में जश्न-ए-सर सैयद का शुभारंभ, वक्ताओं ने शिक्षा के प्रसार और सर सैयद के विचारों पर शोध बढ़ाने पर दिया जोर

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग और सर सैयद एजुकेशनल सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को तीन दिवसीय जश्न-ए-सर सैयद समारोह का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में वक्ताओं ने सर सैयद अहमद खान के शैक्षिक योगदान, मानवीय मूल्यों और आधुनिक शिक्षा के प्रसार पर विचार रखे। मुख्य अतिथि कला संकायाध्यक्ष प्रो. अतवीर सिंह ने कहा कि सर सैयद जैसी महान हस्तियों पर कार्यक्रम आयोजित करना जरूरी है। इससे विद्यार्थियों को मार्गदर्शन मिलता है। शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार और उच्च मानवीय मूल्य भी आवश्यक हैं। शिक्षा किसी वर्ग या संप्रदाय तक सीमित नहीं, बल्कि सभी के लिए जरूरी है। हमें अपनी बात कहने के साथ दूसरों को सुनना भी सीखना चाहिए।

विशिष्ट अतिथि पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. जमाल अहमद सिद्दीकी ने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार और व्यक्तित्व निर्माण का संस्थान भी है। सर सैयद पर अब तक 597 पीएचडी हो चुकी हैं और दुनिया की करीब 97 पत्र-पत्रिकाओं में उनसे संबंधित शोधपत्र प्रकाशित हुए हैं। उन्होंने सर सैयद के शैक्षिक मिशन को आगे बढ़ाने और उन पर अधिक शोध करने की आवश्यकता बताई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सर सैयद एजुकेशनल सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. हाशिम रज़ा ज़ैदी ने कहा कि सर सैयद ने पूरे समुदाय और देश की तकदीर बदल दी। उन्होंने शिक्षा के साथ विज्ञान और पत्रकारिता को भी महत्व दिया तथा जहां गए, वहां संस्थान स्थापित करने का प्रयास किया।

सर सैयद के विचार घर-घर तक पहुंचाने का आह्वान

प्रो. असलम जमशेदपुरी ने कहा कि सर सैयद के व्यक्तित्व के अनेक पहलू हैं, जिन पर शोध की जरूरत है। उनके संदेश को घर-घर और स्कूल-स्कूल तक पहुंचाना चाहिए। खुर्शीद हयात ने सर सैयद के व्यक्तित्व निर्माण में उनकी माता अज़ीज़ुन्निसा के संस्कारों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। डॉ. ज़की तारिक ने शिक्षा के लिए जुटाए गए धन का सदुपयोग समाज के विकास में करने पर जोर दिया। आफाक अहमद खान ने सर सैयद के आधुनिक शिक्षा, महिला शिक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण संबंधी प्रयासों को याद किया। मौलाना सैयद नायाबुद्दीन नायाब ने सर सैयद और मौलाना कासिम नानौतवी के वैचारिक मतभेदों का उल्लेख करते हुए उनके कार्यों के महत्व पर प्रकाश डाला। फैज़ महमूद ने कहा कि सर सैयद द्वारा स्थापित शैक्षिक संस्थान से पढ़े विद्यार्थी देश-विदेश में नाम रोशन कर रहे हैं।

कार्यक्रम का शुभारंभ मोहम्मद नदीम के कुरआन पाठ और फरहत अख्तर की नात से हुआ। इसके बाद अतिथियों ने दीप प्रज्वलित किया। डॉ. इरशाद स्यानवी ने स्वागत भाषण दिया, संचालन डॉ. शादाब अलीम ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अलका वशिष्ठ ने प्रस्तुत किया। इस दौरान डॉ. ज़की तारिक, खुर्शीद हयात, मौलाना नायाबुद्दीन नायाब, आफाक अहमद खान, फैज़ महमूद सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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