चीन के पुर्जों से मिसाइल बनाने की तैयारी में हूती विद्रोही, इजराइल तक बढ़ सकती है मारक क्षमता

ब्रिटिश संस्था की रिपोर्ट में दावा, ईरान की खैबर शिकन मिसाइल जैसा हथियार बनाने की कोशिश; होदेइदा बंदरगाह भेजी जा रही संदिग्ध खेप पकड़ी गई

नई दिल्ली। यमन के हूती विद्रोही चीन से मंगाए गए पुर्जों की मदद से नई बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की तैयारी कर रहे हैं। ब्रिटेन की संस्था कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च (सीएआर) की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, हूती ईरान में डिजाइन की गई खैबर शिकन मिसाइल जैसी मिसाइल तैयार करना चाहते हैं। इस मिसाइल की बताई गई मारक क्षमता करीब 1,500 किलोमीटर है। यदि हूती ऐसी क्षमता विकसित करने में सफल होते हैं, तो सऊदी अरब के साथ इजराइल के लिए भी सुरक्षा चुनौती बढ़ सकती है।

चीन से भेजे गए पुर्जों की खेप पकड़ी गई

रिपोर्ट के अनुसार, यमनी अधिकारियों ने जुलाई में चीन से भेजी गई दो संदिग्ध खेप पकड़ी थीं। इनमें मिसाइल निर्माण में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण पुर्जे शामिल थे। इन खेपों को यमन के होदेइदा बंदरगाह पहुंचाया जाना था। इजराइली अधिकारियों का आरोप है कि इस बंदरगाह का इस्तेमाल ईरान हथियारों की आपूर्ति के लिए करता रहा है।

सीएआर के वरिष्ठ विश्लेषक फैबियन हिंज के मुताबिक, बरामद सामग्री ईरानी डिजाइन पर आधारित मिसाइल बनाने की तैयारियों की ओर संकेत करती है। उन्होंने कहा कि इनमें शामिल कुछ पुर्जों का सामान्य नागरिक उपयोग सीमित है।

मिसाइल की गर्मी से बचाने वाला पदार्थ भी मिला

रिपोर्ट में बताया गया है कि पकड़ी गई खेप में रॉकेट मोटर के हिस्से, मिसाइल को स्थिर रखने वाले घटक और मोटर चालू करने के उपकरण शामिल थे। इसके अलावा फेनोलिक रेजिन नामक पदार्थ भी मिला, जिसका इस्तेमाल मिसाइल के भीतर गर्मी से बचाव करने वाली परत बनाने में किया जा सकता है। तेज गति से उड़ान के दौरान पैदा होने वाली अत्यधिक गर्मी से मिसाइल के हिस्सों को सुरक्षित रखने में ऐसी सामग्री महत्वपूर्ण होती है।

तैयार हथियारों के बजाय खुद निर्माण पर जोर

हूती विद्रोही करीब दो दशक पहले यमन में एक विद्रोही संगठन के रूप में उभरे थे। शुरुआती दौर में उनके पास सोवियत काल के और उत्तर कोरिया में बने हथियार थे। समय के साथ उनकी मिसाइल और ड्रोन क्षमता में वृद्धि हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, हूती अब केवल दूसरे देशों से तैयार हथियार हासिल करने के बजाय अलग-अलग स्रोतों से पुर्जे जुटाकर अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों में हथियार जोड़ने और निर्माण की क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। वे पहले भी सऊदी अरब को निशाना बनाने के लिए बैलिस्टिक मिसाइलों और लंबी दूरी के ड्रोन का इस्तेमाल कर चुके हैं। इजराइल की ओर भी मिसाइल और ड्रोन हमले किए जा चुके हैं।

ईरान पर निर्भरता घटाने की कोशिश

ईरान पर लंबे समय से हूतियों को हथियार, तकनीक और मिसाइल निर्माण से संबंधित सहायता देने के आरोप लगते रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रतिबंधों और आपूर्ति संबंधी बाधाओं के बीच हूती दूसरे देशों से जरूरी सामग्री जुटाने के विकल्प तलाश रहे हैं।

अमेरिकी थिंक टैंक फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के ईरान कार्यक्रम के वरिष्ठ निदेशक बेहनाम बेन तालेब्लू के मुताबिक, कई देशों से उपकरण और सामग्री हासिल करने के रास्ते उपलब्ध होना किसी संगठन की हथियार निर्माण क्षमता बढ़ा सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक मिसाइलों के जटिल सिस्टम विकसित करने के लिए हूतियों की ईरान पर निर्भरता अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

चीन के सामने कूटनीतिक चुनौती

चीन सऊदी अरब और ईरान, दोनों के साथ महत्वपूर्ण व्यापारिक संबंध रखता है। वर्ष 2023 में उसने दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य करने में भी भूमिका निभाई थी। चीन सऊदी अरब का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है और उससे बड़ी मात्रा में तेल खरीदता है।

यदि चीन से भेजे गए पुर्जों का इस्तेमाल हूती विद्रोही मिसाइल निर्माण में कर रहे हैं, तो यह मामला बीजिंग के लिए कूटनीतिक चुनौती बन सकता है। इससे सऊदी अरब के साथ उसके संबंधों पर भी दबाव पड़ने की आशंका है।

हालांकि, रिपोर्ट में सामने आए दावों से यह साबित नहीं होता कि चीन की सरकार ने जानबूझकर हूतियों को मिसाइल निर्माण के लिए सामग्री उपलब्ध कराई थी। इस संबंध में चीन की सरकारी भूमिका और आपूर्ति श्रृंखला की जिम्मेदारी स्पष्ट होना अभी बाकी है।

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