दिल्ली में PG संचालकों की मनमानी पर लगेगी लगाम
मुखर्जी नगर से राजेंद्र नगर तक पेइंग गेस्ट आवासों पर कसेगा शिकंजा, 90 दिन में लाइसेंस लेना होगा; किराया, सुरक्षा और शिकायतों के लिए नए नियम प्रस्तावित
नई दिल्ली। सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में पेइंग गेस्ट (PG) आवासों को लेकर सरकार अब सख्त नियम लागू करने की तैयारी में है। मुखर्जी नगर, लक्ष्मी नगर, राजेंद्र नगर और नॉर्थ कैंपस जैसे प्रमुख शिक्षा केंद्रों में संचालित PG को नियमन के दायरे में लाने के लिए ‘पेइंग गेस्ट एकॉमोडेशन रेगुलेशन एंड वेलफेयर बिल’ का प्रस्ताव सामने आया है। इसका उद्देश्य छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ किराए में मनमानी रोकना और शिकायतों के समाधान की व्यवस्था मजबूत करना है।
प्रस्तावित विधेयक के तहत दिल्ली में संचालित प्रत्येक PG का अनिवार्य पंजीकरण होगा। संचालकों को 90 दिनों के भीतर जोन अथॉरिटी से ऑपरेटिंग लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए पुलिस, नगर निगम और स्थानीय प्रशासन से आवश्यक एनओसी का प्रावधान रखा गया है। पंजीकरण के बाद प्रत्येक PG को एक यूनिक PG रजिस्ट्रेशन नंबर (PGRN) दिया जाएगा।
एक पोर्टल पर मिलेगी PG की पूरी जानकारी
प्रस्तावित GovPG पोर्टल पर सत्यापित PG की सूची के साथ किराया, उपलब्ध सुविधाएं और सुरक्षा संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। छात्र इसी पोर्टल के माध्यम से शिकायत भी दर्ज करा सकेंगे। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखने के लिए गुमनाम शिकायत की सुविधा का भी प्रस्ताव है। PG की अनुपालन रेटिंग भी पोर्टल पर प्रदर्शित की जाएगी।
किराए की मनमानी पर भी रोक
विधेयक में क्षेत्रवार किराया बैंड तय करने के लिए रेंट रेगुलेशन कमेटी गठित करने का प्रस्ताव है। PG संचालक अधिकतम तीन महीने की सिक्योरिटी डिपॉजिट और तीन महीने से अधिक का अग्रिम किराया नहीं ले सकेंगे। PG छोड़ने या खाली कराने के लिए 30 दिन का नोटिस अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। लिंग, जाति, धर्म या मूल राज्य के आधार पर भेदभावपूर्ण किराया वसूलने पर भी रोक लगाने की बात कही गई है।
CCTV से लेकर सुरक्षा गार्ड तक अनिवार्य
प्रस्तावित नियमों के तहत PG के सभी प्रवेश द्वारों और कॉमन एरिया में CCTV कैमरे लगाना अनिवार्य होगा। कैमरों की फुटेज कम से कम 30 दिन तक सुरक्षित रखनी होगी। 15 या उससे अधिक छात्रों वाले PG में रात के समय सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था करनी होगी। विजिटर रजिस्टर के साथ 500 मीटर के दायरे में वार्डन की उपलब्धता का भी प्रस्ताव है।
कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों की भी जिम्मेदारी
प्रस्ताव में Institutional Accommodation Committee (IAC) बनाने की बात कही गई है। इसमें फैकल्टी, छात्र प्रतिनिधि, पुलिस और नगर निकाय के प्रतिनिधियों को शामिल करने का प्रस्ताव है। समितियां हर तिमाही PG का निरीक्षण करेंगी। विवादों के निपटारे के लिए 15 कार्यदिवस की समयसीमा तय करने का प्रस्ताव है।
नियम मानने वाले संचालकों को प्रोत्साहन
लगातार दो साल तक संतोषजनक अनुपालन करने वाले PG संचालकों को प्रॉपर्टी टैक्स में छूट, आसान ऋण और ‘Certified Student-Friendly PG’ बैज देने का प्रस्ताव है। PG कारोबार को प्रोत्साहित करने के लिए GST राहत के संबंध में GST काउंसिल से मांग करने का सुझाव भी दिया गया है।
हादसों और शिकायतों के बाद जरूरत महसूस हुई
प्रस्तावित विधेयक में दिल्ली के मौजूदा PG सिस्टम की खामियों का भी उल्लेख किया गया है। पुराने राजेंद्र नगर में बेसमेंट हादसे, मुखर्जी नगर में PG में आग और सुरक्षा उल्लंघनों के अलावा यौन उत्पीड़न, छिपे कैमरों और मनमाने बिजली बिल जैसी शिकायतों ने सुरक्षित छात्र आवास की जरूरत को सामने रखा है।
हालांकि नियमों को लागू करना आसान नहीं होगा। छोटे और अनौपचारिक PG का पंजीकरण, कई विभागों से एनओसी, पोर्टल का संचालन और क्षेत्रवार किराया तय करना बड़ी चुनौतियां हो सकती हैं। इसके लिए सिंगल-विंडो क्लियरेंस, चरणबद्ध कार्रवाई और समर्पित समन्वयक जैसे उपाय सुझाए गए हैं। प्रस्तावित नीति लागू होने के बाद दिल्ली में PG आवासों के लिए न्यूनतम सुरक्षा मानक, पारदर्शी किराया व्यवस्था और शिकायत निवारण की जवाबदेह व्यवस्था बनाने का लक्ष्य है।


No comments:
Post a Comment