पढ़ाई के साथ कमाई का मौका, CCSU छात्रों को मिलेगी एक साल की सवेतन अप्रेंटिसशिप
BOAT/NATS से विश्वविद्यालय का एमओयू, 30 से अधिक उद्योगों से जुड़ेंगे विद्यार्थी; अप्रेंटिसशिप के साथ प्लेसमेंट में भी मिलेगा सहयोग
मेरठ। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप कौशल आधारित, रोजगारपरक और उद्योग से जुड़ी उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने बड़ी पहल की है। विश्वविद्यालय और बोर्ड ऑफ अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग (नॉर्दर्न रीजन), कानपुर (BOAT/NATS) के बीच मंगलवार को महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए। इसका उद्देश्य विश्वविद्यालय परिसर और संबद्ध महाविद्यालयों के पात्र विद्यार्थियों को सवेतन अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण, कौशल विकास, औद्योगिक अनुभव तथा रोजगार और प्लेसमेंट के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
एमओयू पर कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला की मौजूदगी में विश्वविद्यालय की ओर से कुलसचिव प्रो. भूपेंद्र राणा और BOAT/NATS की ओर से निदेशक विवेक कुमार ने हस्ताक्षर किए। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. अंशु ने किया।
एक साल की अप्रेंटिसशिप, 12 हजार तक स्टाइपेंड
एमओयू की खास बात यह है कि पात्र विद्यार्थियों को एक वर्ष की सवेतन अप्रेंटिसशिप का अवसर मिलेगा। अप्रेंटिसशिप के दौरान नियमानुसार करीब 12 हजार रुपये प्रतिमाह तक स्टाइपेंड मिल सकता है। इसके साथ विद्यार्थियों को उद्योगों में वास्तविक कार्य का अनुभव मिलेगा, जिससे उनके तकनीकी कौशल और रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी। अप्रेंटिसशिप पूरी करने के बाद नौकरी एवं प्लेसमेंट के अवसरों में भी विश्वविद्यालय और उद्योगों की ओर से सहयोग किया जाएगा।
कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि उन्हें कौशलयुक्त, आत्मनिर्भर और रोजगार के लिए तैयार करना है। NATS के माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ उद्योगों में काम करने का व्यावहारिक अनुभव और सवेतन प्रशिक्षण मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल NEP-2020 की उस भावना के अनुरूप है, जिसमें शिक्षा को ज्ञान के साथ कौशल, व्यावहारिक अनुभव और रोजगार से जोड़ने पर जोर दिया गया है।
संबद्ध कॉलेजों के विद्यार्थियों को भी मिलेगा लाभ
विश्वविद्यालय की ओर से प्रो. वीरपाल सिंह ने बताया कि इस पहल का लाभ विश्वविद्यालय परिसर के साथ संबद्ध महाविद्यालयों के पात्र विद्यार्थियों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उद्योगों से सीधा संपर्क होने से विद्यार्थी अपनी शैक्षणिक योग्यता को व्यावहारिक कौशल में बदल सकेंगे। उन्होंने कहा कि अप्रेंटिसशिप विद्यार्थियों के करियर निर्माण और रोजगार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय और उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर अप्रेंटिसशिप, इंटर्नशिप, प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट के अवसर बढ़ाए जाएंगे। इससे विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही उद्योगों की कार्यप्रणाली और कार्यस्थल की जरूरतों की जानकारी मिल सकेगी।
2 सितंबर को 30 से अधिक उद्योगों के साथ बैठक
एमओयू के अगले चरण में 2 सितंबर 2026 को विश्वविद्यालय के अटल सभागार में Industry-Institute Meet आयोजित किया जाएगा। इसमें 30 से अधिक उद्योगों एवं प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। बैठक में विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्य और संस्थागत प्रतिनिधि उद्योगों के अधिकारियों के साथ विद्यार्थियों के प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप, इंटर्नशिप एवं प्लेसमेंट को लेकर सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे।
कार्यक्रम में BOAT/NATS के निदेशक विवेक कुमार, सहायक निदेशक सुनील कुमार एवं नवीन कुमार पाठक शामिल होंगे। NATS के अधिकारियों की ओर से योजना, पंजीकरण प्रक्रिया, उच्च शिक्षण संस्थानों एवं उद्योगों की भूमिका और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध अप्रेंटिसशिप अवसरों की जानकारी दी जाएगी। विश्वविद्यालय के AEDP नोडल अधिकारी प्रो. के.के. शर्मा भी कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे।
डिग्री के साथ उद्योग आधारित प्रशिक्षण
Industry-Institute Meet में Apprenticeship Embedded Degree Programme (AEDP) पर भी विशेष चर्चा होगी। इसके माध्यम से डिग्री शिक्षा में उद्योग आधारित व्यावहारिक प्रशिक्षण को शामिल करने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को कक्षा में प्राप्त सैद्धांतिक ज्ञान के साथ वास्तविक कार्यस्थल का अनुभव उपलब्ध कराना है।
विश्वविद्यालय का मानना है कि इस पहल से विद्यार्थियों के कौशल विकास और रोजगार क्षमता को बढ़ावा मिलेगा तथा उच्च शिक्षा और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा।


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