ब्रह्म-इंद्र योग में गणेश चतुर्थी, साथ में हरितालिका व्रत का संयोग

स्वाती नक्षत्र में गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 11:02 से दोपहर 1:31 बजे तक, सुहागिनें अखंड सौभाग्य के लिए रखेंगी व्रत

अलीगढ़। इस बार गणेश चतुर्थी पर विशेष ज्योतिषीय संयोग बन रहा है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर स्वाती नक्षत्र के साथ ब्रह्म और इंद्र योग का संयोग रहेगा। वैदिक ज्योतिष संस्थान के प्रमुख स्वामी पूर्णानंदपुरी जी महाराज के अनुसार, इस विशेष संयोग में भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने से सुख-समृद्धि और धन-संपदा की प्राप्ति होती है।

उन्होंने बताया कि चतुर्थी तिथि सोमवार सुबह 7:06 बजे से शुरू होकर 15 सितंबर को सुबह 7:44 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार गणेश चतुर्थी का पर्व सोमवार को मनाया जाएगा। गणेश स्थापना एवं पूजन के लिए सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक का समय शुभ रहेगा।

मध्याह्न में गणेश पूजन विशेष फलदायी

स्वामी पूर्णानंदपुरी जी महाराज ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था। इसलिए गणेश चतुर्थी पर दोपहर के समय गणेश प्रतिमा की स्थापना और पूजा करना विशेष शुभ माना जाता है। इस बार स्वाती नक्षत्र के साथ ब्रह्म एवं इंद्र योग का संयोग पर्व की महत्ता को और बढ़ा रहा है।

गणेश चतुर्थी के साथ हरितालिका व्रत

इस बार हरितालिका व्रत का भी गणेश चतुर्थी के साथ संयोग बन रहा है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि रविवार सुबह 7:23 बजे से सोमवार सुबह 7:06 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार हरितालिका व्रत सोमवार को ही रखा जाएगा।

सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना से हरितालिका व्रत रखती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं मनचाहा वर प्राप्त करने की कामना से निर्जल व्रत रखकर माता पार्वती और भगवान शिव की आराधना करती हैं।

माता पार्वती ने की थी कठोर तपस्या

पौराणिक कथा के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को माता पार्वती ने पार्थिव शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। इसी मान्यता के कारण हरितालिका व्रत को दांपत्य सुख, अखंड सौभाग्य और मनोकामना पूर्ति से जोड़कर देखा जाता है।

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