मॉलिक्यूलर डॉकिंग से दवा खोज को मिलेगी नई दिशा
मेरठ कॉलेज में दो दिवसीय कार्यशाला में 75 प्रतिभागियों ने सीखी आधुनिक कम्प्यूटेशनल तकनीकें
मेरठ। मेरठ कॉलेज के वनस्पति विज्ञान विभाग की ओर से 10 और 11 सितंबर को ‘मॉलिक्यूलर डॉकिंग : थ्योरी से प्रैक्टिस’ विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें स्नातकोत्तर विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों को आधुनिक दवा खोज में इस्तेमाल होने वाली कम्प्यूटेशनल तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला में करीब 75 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
नई दिल्ली के बायोकेमिस्ट्री विशेषज्ञ प्रो. डॉ. अरविंद कुमार शाक्य ने व्याख्यान के साथ प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि मॉलिक्यूलर डॉकिंग आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और दवा खोज की महत्वपूर्ण कम्प्यूटेशनल तकनीक है। इसके जरिए यह अनुमान लगाया जा सकता है कि कोई संभावित औषधीय यौगिक रोग से जुड़े प्रोटीन के साथ किस प्रकार जुड़ सकता है। कंप्यूटर आधारित इन-सिलिको तकनीकों से संभावित दवा उम्मीदवारों की शुरुआती पहचान कर समय और संसाधनों की बचत की जा सकती है।
कार्यशाला में प्रतिभागियों ने प्रोटीन और लिगैंड संरचना तैयार करने, बाइंडिंग साइट की पहचान, डॉकिंग ग्रिड निर्धारित करने, स्कोरिंग और अनुमानित बाइंडिंग एनर्जी जैसी प्रक्रियाएं सीखीं। PyRx सॉफ्टवेयर के माध्यम से प्रोटीन-लिगैंड डॉकिंग, परिणामों के विश्लेषण और आणविक अंतःक्रियाओं की पहचान का भी प्रशिक्षण दिया गया।
विशेषज्ञ ने स्पष्ट किया कि कम्प्यूटेशनल डॉकिंग से मिले परिणाम प्रारंभिक स्तर पर उपयोगी होते हैं और उनकी पुष्टि आगे प्रयोगशाला तथा चिकित्सकीय परीक्षणों के जरिए करना आवश्यक है।
कार्यशाला के समन्वयक प्रो. हरजिंदर सिंह रहे, जबकि प्रो. नूपुर प्रसाद ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। समापन अवसर पर प्राचार्य प्रो. युद्धवीर सिंह ने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए। आयोजन में डॉ. एनपी सिंह, प्रो. अनुराधा सिंह, प्रो. श्याम सिंह, डॉ. सीमा रानी, प्रो. पंजाब सिंह, प्रो. सुमन वर्मा, प्रो. सुरभि राठौर और तनिष्का का सहयोग रहा।

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