मलेशिया में बंधुआ मजदूरी और मानव तस्करी के आरोप, मेरठ लौटे बब्बर ने सुनाई आपबीती

70 हजार रुपये मासिक वेतन का झांसा देकर मलेशिया भेजने का आरोप; पीड़ित ने कहा—पासपोर्ट छीनकर कराया गया जबरन काम, मजबूरी में खाना पड़ा मांस

मेरठ, 2 सितंबर 2026।मलेशिया में नौकरी और बेहतर वेतन का सपना दिखाकर गरीब मजदूरों को कथित तौर पर मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी के जाल में फंसाने का मामला सामने आया है। मेरठ के किठौर क्षेत्र के गांव असिलपुर निवासी निर्माण मजदूर बब्बर पुत्र ओमी सिंह ने भारत लौटने के बाद अपनी आपबीती सुनाई। उसका आरोप है कि मलेशिया में उसका पासपोर्ट छीन लिया गया और अलग-अलग कंपनियों में बिना वेतन के जबरन काम कराया गया। उसने यह भी दावा किया कि वहां हालात इतने खराब थे कि कई बार मजबूरी में मांस तक खाना पड़ा।

बब्बर के अनुसार, जनवरी 2026 में मुजफ्फरनगर के सिखरेड़ा निवासी ईशा पुत्र मुस्तफा उसके घर आया था। उसने मलेशिया में बादाम पैकिंग का काम और 70 हजार रुपये मासिक वेतन दिलाने का भरोसा दिया। आरोप है कि टिकट आदि के नाम पर उससे 1.60 लाख रुपये लिए गए। ईशा ने उसे बताया कि उसकी 'ईशान ट्रावेल्स' नाम की कंपनी है और उसी के माध्यम से उसे मलेशिया भेजा जा रहा है।

मुंबई से थाईलैंड, फिर मलेशिया पहुंचने का आरोप

बब्बर के मुताबिक, 9 मार्च 2026 को वह मेरठ से ट्रेन के जरिए मुंबई एयरपोर्ट पहुंचा। आरोप है कि ईशा ने उसे एयरपोर्ट में प्रवेश कराने के बाद कहा कि वह दो दिन बाद कुछ और मजदूरों को लेकर आएगा और उसके स्टाफ के लोग बब्बर को काम पर लगा देंगे।

बब्बर का आरोप है कि इसके बाद उसे कई कंपनियों और उनके एजेंटों के हवाले कर दिया गया। इनमें जीएनटी कुआलालंपुर, वीके जौहर बाघ, यूनिवर्सल स्टोन-ACACIA और मोटर सर्विस से जुड़े नाम शामिल हैं। उसके मुताबिक, उससे बिना वेतन के काम कराया गया।

उसने बताया कि उसके साथ समीर, शहनाज और नदीम समेत अन्य मजदूर भी थे। बब्बर के अनुसार, मुंबई से उन्हें थाईलैंड पहुंचाया गया। जब उसने सवाल किया कि मलेशिया की जगह थाईलैंड क्यों पहुंच गए तो कथित तौर पर उसे चुप रहने के लिए कहा गया। उसका दावा है कि तीन-चार मजदूरों के समूह में दो-तीन दिन के अंतराल से बॉर्डर पार कराकर उन्हें मलेशिया पहुंचाया गया।

पासपोर्ट छीनने और नेपाली पहचान देने का आरोप

बब्बर ने आरोप लगाया कि मलेशिया पहुंचने के बाद शमीम नाम के एजेंट ने उसका और अन्य मजदूरों का पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद खालिद नामक व्यक्ति ने कथित तौर पर उन्हें नेपाल के फर्जी पासपोर्ट की प्रतियां दीं।

बब्बर के अनुसार, उसके पास जो कॉपी दी गई उसमें नाम 'तजिंदर' लिखा था, जबकि फोटो उसी का लगा था। उसने कहा कि उस समय उसे लगा कि वह भारतीय से नेपाली बना दिया गया है।

अलग-अलग कंपनियों में काम, वेतन नहीं मिलने का दावा

बब्बर ने बताया कि उसे और अन्य मजदूरों को अलग-अलग कंपनियों में काम कराया गया। इनमें Kilang Pemasangan Kenderaan Bermotor और ACACIA Motor Services SDN. BHD. का भी उसने उल्लेख किया। उसका दावा है कि काम कराने के बावजूद उसे मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया।

इसी दौरान बब्बर ने अपने भाई बिल्लू को फोन कर पूरी घटना बताई। बब्बर के अनुसार, भाई उसकी स्थिति सुनकर बेहद परेशान हो गया और परिवार को यह सब बताने को लेकर भावुक हो गया।

एनसीसीईबीएल ने अधिकारियों से की शिकायत

नेशनल कैंपेन कमिटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ बॉन्डेड लेबर (NCCEBL) के कन्वीनर निर्मल गोराना के अनुसार, दानिश नाम के एक पूर्व मुक्त बंधुआ मजदूर ने उन्हें मलेशिया में अपने और अन्य मजदूरों के कथित शोषण की जानकारी दी। इसके बाद संगठन की ओर से मेरठ और मुजफ्फरनगर के जिलाधिकारियों व पुलिस अधिकारियों, भारत सरकार के श्रम मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और मलेशिया हाई कमीशन समेत संबंधित अधिकारियों को ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजी गई।

संगठन का दावा है कि भारत सरकार के मदद पोर्टल पर भी जानकारी साझा की गई, हालांकि अपेक्षित सहयोग नहीं मिल सका।

इधर बब्बर के भाई ने भी मेरठ के जिलाधिकारी, पुलिस अधिकारियों और किठौर थाने में लिखित शिकायत दी। बब्बर के मुताबिक, करीब दो महीने के संघर्ष के बाद वह व्हाइट पासपोर्ट के जरिए 1 अगस्त 2026 की शाम मेरठ लौट सका। उसका आरोप है कि भारत लौटने के बाद भी शिकायत वापस लेने के लिए उसे और उसके भाई को धमकियां दी जा रही हैं।

'दलालों के धक्के और मुक्के भी खाने पड़े'

बब्बर ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि मलेशिया में हालात बेहद खराब थे। उसके अनुसार, कई बार खाने तक की समस्या हुई और मजबूरी में मांस खाना पड़ा। उसने आरोप लगाया कि दलालों ने उसके साथ मारपीट भी की और लंबे समय तक शोषण के कारण उसका स्वास्थ्य खराब हो गया।

उसने यह भी आरोप लगाया कि उसे टूरिस्ट वीजा पर मलेशिया ले जाया गया और तीन महीने के भीतर वर्क परमिट दिलाने का भरोसा दिया गया था, लेकिन समय बीतने के बाद कथित तौर पर कोई सहयोग नहीं किया गया।

समीर के मलेशिया की जेल में होने का दावा

बब्बर के अनुसार, मुजफ्फरनगर निवासी समीर भी इसी तरह मलेशिया पहुंचा था और फिलहाल जेल में है। उसका दावा है कि पर्याप्त दस्तावेज नहीं होने के कारण समीर वहां फंस गया है। बब्बर ने आरोप लगाया कि एजेंट की ओर से समीर के परिवार को उसे छुड़ाकर भारत लाने का भरोसा दिया जा रहा है, लेकिन उसकी बकाया मजदूरी का भुगतान अभी तक नहीं हुआ है।

तीन लाख रुपये कर्ज लेकर गए सोनू और सलमान

बब्बर के अनुसार, सोनू और सलमान नाम के दो युवा मजदूर भी इस पूरे मामले में कथित तौर पर फंसे। दोनों ने मलेशिया जाने के लिए करीब तीन लाख रुपये का कर्ज लिया था। बाद में उन्हें समझ आया कि टूरिस्ट वीजा के कारण वे वहां फंस सकते हैं।

बब्बर के मुताबिक, दोनों ने अपने परिवारों से दोबारा पैसे मंगवाकर वापसी का इंतजाम किया। सोनू ने कथित तौर पर एजेंट को पैसे देकर अपना पासपोर्ट वापस लिया और भारत लौट आया। बब्बर का कहना है कि सोनू अब गुजरात के मेहसाना में काम कर रहा है और मलेशिया जाने के लिए लिया गया कर्ज चुका रहा है।

दानिश ने वीडियो जारी कर सुनाई परेशानी

बब्बर के मुताबिक, दानिश नाम का एक पूर्व मुक्त बंधुआ मजदूर भी मलेशिया में कथित तौर पर दोबारा बंधुआ मजदूरी के हालात में फंस गया है। दानिश ने वीडियो के माध्यम से अपनी स्थिति साझा की है।

आरोप है कि मलेशिया जाने के लिए दानिश ने जमीन गिरवी रखकर पैसे जुटाए थे। अब भारत लौटने पर कर्ज और जमीन गंवाने की चिंता तथा वापसी का खर्च उठाने की समस्या के कारण वह वहां फंसा हुआ है। दानिश का दावा है कि उसने अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन अब तक उससे किसी अधिकारी ने संपर्क नहीं किया।

रमजान ने भी वीडियो भेजकर लगाई मदद की गुहार

मुजफ्फरनगर निवासी निर्माण मजदूर रमजान के भी मलेशिया में फंसे होने का दावा किया गया है। बब्बर के अनुसार, रमजान ने वीडियो भेजकर भारत और उत्तर प्रदेश सरकार से मदद और घर वापसी की अपील की है।

रमजान का आरोप है कि उसकी मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया और घर वापस जाने की अनुमति भी एजेंट की मर्जी पर निर्भर बताई गई। ज्यादा बोलने पर पुलिस से पकड़वाने की धमकी देने का भी उसने आरोप लगाया है।

भारत लौटने से पहले वीडियो और हस्ताक्षर का दबाव

बब्बर ने आरोप लगाया कि भारत लौटने से पहले ईशा और उसके भाई जावेद ने उस पर दबाव बनाया। उससे कथित तौर पर वीडियो बनाकर यह कहने को कहा गया कि ईशा अच्छा व्यक्ति है और उसे कोई शिकायत नहीं है। कागज पर हस्ताक्षर करने का भी दबाव डालने का आरोप है।

बब्बर के मुताबिक, ऐसा करने से इनकार करने पर उसे कमरे में बंद कर दिया गया। एयरपोर्ट पहुंचने के बाद भी टिकट कैंसल कराने की धमकी दिए जाने का आरोप है। उसका कहना है कि मेरठ पुलिस की कार्रवाई के डर से ऐसा नहीं किया गया और वह भारत लौट सका।

एनएचआरसी में मामला उठाने की तैयारी

NCCEBL के कन्वीनर निर्मल गोराना ने बब्बर से मुलाकात के बाद कहा कि मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष उठाया जाएगा। संगठन की ओर से पीड़ित मजदूरों के बयान दर्ज कराने, उनकी बकाया मजदूरी दिलाने और आरोपों की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग किए जाने की बात कही गई है।

निर्मल गोराना का कहना है कि बब्बर अनुसूचित जाति से हैं। उनके अनुसार, मामले की जांच में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, बंधुआ मजदूरी प्रथा (उन्मूलन) अधिनियम और मानव तस्करी से संबंधित प्रावधानों को भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब दो महीने से मामला लंबित है और अब आरोपियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए तथा पीड़ितों को दर्ज शिकायत और एफआईआर की प्रति उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

No comments:

Post a Comment

Popular Posts