‘हेमा’ और ‘जेल की सलाखों से’ पुस्तकों का विमोचन, हिंदी-संस्कृत के 30 मेधावी विद्यार्थी सम्मानित

मेरठ । हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को महर्षि दयानंद इंटर कॉलेज में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पल्हैड़ा निवासी स्वतंत्रता सेनानी रत्नाकर शास्त्री की दो पुस्तकों ‘हेमा’ और ‘जेल की सलाखों से’ का विमोचन किया गया। इस अवसर पर हिंदी और संस्कृत विषय में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यालय के 30 मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती और भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। मुख्य अतिथि पूर्व राज्यसभा सदस्य विजयपाल सिंह तोमर ने कहा कि उनकी पीढ़ी में आधुनिक तकनीक और मोबाइल का इतना चलन नहीं था। बच्चे बड़ों का सम्मान करते थे और उनमें संस्कार होते थे। आज विद्यार्थी अच्छे अंक प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन संस्कारों में आ रही कमी चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा कि देश को आजादी दिलाने के लिए हमारे पूर्वजों ने अनेक यातनाएं सहीं। स्वतंत्रता सेनानी रत्नाकर शास्त्री भी ऐसे ही महान सेनानियों में शामिल थे। उनकी पुस्तकों का विमोचन उनके संघर्ष, अनुभव और साहित्यिक योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर है।

रामायणकालीन मेरठ की पृष्ठभूमि पर आधारित है ‘हेमा’

विजयपाल तोमर ने बताया कि ‘हेमा’ रामायण पर आधारित कथा है, जिसकी पृष्ठभूमि मेरठ की रामायणकालीन परिस्थितियों से जुड़ी हुई है। वहीं ‘जेल की सलाखों से’ रत्नाकर शास्त्री की जेल डायरी और जेल जीवन के अनुभवों पर आधारित पुस्तक है। इसमें हैदराबाद के जेल जीवन का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है।

गुरुकुल के प्रधानाचार्य ने विद्यार्थियों को बड़ों का सम्मान करने तथा अच्छे अंक प्राप्त करने के साथ संस्कारवान बनने का आशीर्वाद दिया। सरधना के पूर्व एसडीएम मानसिंह पुंडीर ने विद्यार्थियों को जीवन में आगे बढ़ने के गुर बताए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को ज्ञान अर्जित करने पर ध्यान देना चाहिए। मोबाइल में अनुपयोगी सामग्री के साथ ज्ञान का भी अकूत भंडार है, जरूरत उसके सही इस्तेमाल की है।

पिता के जेल जीवन और लेखन पर डाला प्रकाश

स्वतंत्रता सेनानी रत्नाकर शास्त्री के पुत्र शीलेंद्र चौहान ने उनके जेल जीवन, पुस्तकों के लेखन और दोनों कृतियों की विषय-वस्तु पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन व्यंग्य लेखक विनय नोक ने किया।

इस अवसर पर प्रेमपाल सिंह, नीतीश राजपूत, महेश चौहान, कमल चौहान, डॉ. आदिप कोटपाल, सुशील चौहान, सुबेराम, कुलबीर, राकेश सोम, पंख प्रकाशन के नीतीश राजपूत और चरण सिंह स्वामी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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