जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के लंबित आवेदनों का पुरानी व्यवस्था से होगा निस्तारण

दो साल से अधिक पुराने आवेदनों पर शासन के निर्देश, मेरठ के 160 से अधिक आवेदकों को राहत

मेरठ। जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए लंबे समय से कार्यालयों के चक्कर काट रहे लोगों को राहत मिली है। शासन ने दो वर्ष से अधिक समय से लंबित जन्म-मृत्यु पंजीकरण के आवेदनों को नई व्यवस्था लागू होने से पहले मौजूदा नियमों के तहत शीघ्र निस्तारित करने के निर्देश दिए हैं। इससे मेरठ में ऐसे 160 से अधिक लंबित आवेदनों के निस्तारण का रास्ता साफ हो गया है।

भारत सरकार ने जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम-1969 में छह अगस्त को संशोधन किया था। संशोधन के तहत दो वर्ष से अधिक देरी वाले जन्म-मृत्यु पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के सत्यापन आदेश को अनिवार्य किए जाने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, नई व्यवस्था से संबंधित तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी तरह लागू नहीं होने के कारण लंबित आवेदनों के निस्तारण को लेकर नगर निगम और एसडीएम कार्यालयों के बीच स्थिति स्पष्ट नहीं थी।

पुरानी प्रक्रिया से जारी होंगे प्रमाण पत्र

निदेशक, जनगणना संचालन एवं नागरिक पंजीकरण की ओर से जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि संशोधित व्यवस्था लागू होने से पहले अधिकारियों के पास लंबित मामलों का निस्तारण वर्तमान प्रक्रिया के अनुसार किया जाए। नई व्यवस्था का पोर्टल और दिशा-निर्देश पूरी तरह सक्रिय होने तक एसडीएम स्तर से सत्यापन की प्रक्रिया पुरानी नियमावली के अनुसार पूरी की जाएगी।

हर महीने आते हैं हजारों आवेदन

नगर निगम के तीनों जोनल कार्यालयों में हर महीने औसतन 4000 जन्म प्रमाण पत्र और 1000 मृत्यु प्रमाण पत्र के आवेदन आते हैं। इनमें 160 से अधिक आवेदन दो वर्ष से ज्यादा देरी वाली श्रेणी के बताए गए हैं।

नियमों में बदलाव के बीच प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होने के कारण कई लोग बच्चों के स्कूल दाखिले, सरकारी योजनाओं और अन्य जरूरी कार्यों के लिए प्रमाण पत्र बनवाने को लेकर परेशान थे। अब लंबित आवेदनों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद है।

अपर नगर आयुक्त पंकज कुमार सिंह ने बताया कि दो वर्ष से अधिक देरी वाले आवेदन एसडीएम कार्यालय भेजे जा रहे हैं। सत्यापन के बाद प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। यह प्रक्रिया नई व्यवस्था प्रभावी होने तक जारी रहेगी।

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