बच्चों में मानसिक समस्याओं की समय पर पहचान जरूरी

ध्यान की कमी, व्यवहार में बदलाव या पढ़ाई में परेशानी को नजरअंदाज न करें, विशेषज्ञ की सलाह से मिल सकती है सही मदद

मेरठ। बच्चों और किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं अब महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मुद्दा बनती जा रही हैं। ध्यान की कमी, अत्यधिक चंचलता, घबराहट, उदासी, पढ़ाई में परेशानी या व्यवहार में लगातार बदलाव को कई बार उम्र का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे लक्षण लगातार दिखाई दें तो समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

चाइल्ड एंड एडोलसेंट साइकियाट्री बच्चों और किशोरों की मानसिक, भावनात्मक और व्यवहार संबंधी समस्याओं की पहचान व उपचार की विशेष चिकित्सा शाखा है। इसमें बच्चे के लक्षणों के साथ उसके विकास, पढ़ाई, परिवार, दोस्तों और आसपास के वातावरण को भी समझा जाता है। समय पर समस्या की पहचान होने से बच्चे को उचित मदद देकर आगे की परेशानियों को कम किया जा सकता है।

मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत के साइकियाट्री, चाइल्ड एंड एडोलसेंट साइकियाट्री विभाग के कंसल्टेंट डॉ. आस्तिक जोशी ने बताया कि बच्चों में चिंता, डिप्रेशन, एडीएचडी, ऑटिज्म, ओसीडी, सीखने से जुड़ी दिक्कत और व्यवहार में बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बच्चे के व्यवहार में लगातार परिवर्तन दिखने पर माता-पिता को विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

उन्होंने कहा कि बच्चों के उपचार में डॉक्टर, मनोवैज्ञानिक, स्पीच थेरेपिस्ट, ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट, शिक्षक और परिवार मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। स्कूल भी बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहयोग कर सकते हैं। टेलीमेडिसिन के माध्यम से छोटे शहरों और दूरदराज के क्षेत्रों के परिवारों को भी विशेषज्ञ सलाह मिल सकती है। हालांकि विशेषज्ञों की कमी, सामाजिक झिझक और जागरूकता का अभाव अब भी चुनौती है।

समय रहते बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने से उनके बेहतर विकास, पढ़ाई, सामाजिक संबंधों और भविष्य को मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है।

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